वास्तु के अनुसार घर में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना होगा बड़ा नुकसान!

नई दिल्ली। आज हम चर्चा करेंगे कि वास्तु दोष हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करता है। हर जगह की अपनी प्रकृति और कारक होते हैं। चीजों को गलत जगह रखने से घर का वास्तु खराब हो जाता है। प्रतिकूल स्थान पर रखी वस्तुओं के कारण शरीर में अनेक प्रकार के रोग होने लगते हैं। आइए जानते हैं वास्तु और बीमारियों के बीच संबंध।

यदि देवस्थान के घर या पूजा स्थल में यानि ईशान कोण में शौचालय बना हो तो घर के लोगों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। घर के मुखिया के फैसले अक्सर गलत साबित होते हैं। ऐसा देखा गया है कि ऐसे घर में रहने वाले लोगों की तरक्की भी रुक जाती है। यदि लोग पूर्वोत्तर में सोते हैं, तो उन्हें अनिद्रा, बुरे सपने, स्मृति हानि सहित कई मानसिक विकारों का सामना करना पड़ता है।

वहीं दूसरी ओर उत्तर पूर्व में किचन का होना कई तरह के तनाव और बीमारियों का कारण होता है। उत्तर-पूर्वी रसोई घर को आशीर्वाद नहीं देती है और घर के लोगों को पेट और वायु रोगों से पीड़ित रहती है। उत्तर-पूर्व दिशा में दोष होने पर घर के पुरुष वर्ग को स्त्रियों से अधिक कष्ट उठाना पड़ता है। इसी प्रकार दक्षिण दिशा में वास्तु दोष होने पर पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों को अधिक कष्ट उठाना पड़ता है।

दक्षिण-पूर्व यानि आग्नेय कोण में अग्नि तत्वों की प्रचुरता होती है। यहां आग जलाने से विशेष लाभ होता है। इस स्थान पर जल स्रोत बनाने या फिल्टर रखने से आंत, पेट, फेफड़े से संबंधित रोग होने की संभावना बहुत अधिक होती है।

हवा की प्रधानता हमेशा उत्तर-पश्चिम यानी हवा के कोण में रहती है। इस कोण में भारी सामान रखने की व्यवस्था हानिकारक सिद्ध होती है। इस कोण में भारी सामान रखने से वायु दर्द, हड्डी रोग और मानसिक विकार उत्पन्न हो सकते हैं। जिन लोगों ने लंबे समय तक हवा में भारी सामान रखा है, उन्हें सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, साइटिका और स्लिप डिस्क की समस्या हो सकती है।

दक्षिण-पश्चिम यानि दक्षिण-पश्चिम कोण में पृथ्वी तत्व की प्रधानता होती है। यदि यह दिशा खाली रहती है तो घर के सदस्यों में तनाव और गुस्सा अधिक रहता है। इस स्थान पर भारी सामान रखना चाहिए। ऐसा करने से घर के लोगों का मन शांत रहता है। इसके विपरीत होने पर मन बेचैन हो जाता है। ब्लड प्रेशर की समस्या का सामना करना पड़ता है। यदि दक्षिण से भूखंड में पानी का रिसाव हो तो घर के मुखिया को असाध्य रोग हो जाते हैं और धीरे-धीरे उसका स्वास्थ्य बिगड़ जाता है।

भवन के मध्य भाग को ब्रह्म स्थान कहा जाता है। इस स्थान पर आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व किया जाता है। इस जगह को खुला और साफ रखना चाहिए। अगर यहां निर्माण या भारी सामान है तो घर के लोग पागलपन का शिकार हो सकते हैं। घर में बच्चे हिंसक हो सकते हैं। मानसिक संतुलन गड़बड़ा जाता है। यदि ब्रह्म स्थान पर नल या जल संग्रह हो तो गृहस्थ के स्वास्थ्य और समृद्धि पर गलत प्रभाव पड़ता है।