5 साल बीते, फिर भी घरवालों से नहीं मिल पाई पाकिस्तानी से आई गीता

गीता को इंदौर के मूक बधिर संस्था में रखा गया है। इन 5 वर्षों में गीता के परिवार की तलाश जारी हैं, लेकिन उसके माता-पिता नहीं मिल सके हैं।

इंदौर। पाकिस्तान से भारत लाई गई मूक-बधिर गीता को इंदौर आए 5 साल पूरे हो चुके हैं। 26 अक्टूबर 2015 में गीता को भारत लाया गया था। गीता को इंदौर के मूक बधिर संस्था में रखा गया है। इन 5 वर्षों में गीता के परिवार की तलाश जारी हैं, लेकिन उसके माता-पिता नहीं मिल सके हैं।

पूर्व विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज की पहल पर गीता को भारत लाया गया था। उसी समय केंद्र सरकार की सक्रियता से गीता के परिवार की तलाश शुरू हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

इंदौर की मूक बधिर संस्था जहाँ गीता रह रही हैं उन्होंने एक बार फिर गीता के परिवार को ढूंढने की कोशिश की गई है आज गीता इंदौर के जीआरपी थाने में मूक बधिर संस्था के पदाधिकारियों के साथ पहुची और यहां पर उसे रेलवे स्टेशन दिखाया गया क्योंकि गीता लगातार यही बता रही है कि उसके घर के पास में रेलवे स्टेशन था और खेत खलिहान थे।

इसके अलावा भी उसने कई और निशानियां बताई है मुक बधिर संस्था के पदाधिकारियों का यही कहना है कि गीता जो निशानदेही उसके परिवार के बारे में बता रही है उसमें जीआरपी थाने की भूमिका अहम हो सकती है क्योंकि जीआरपी पुलिस का नेटवर्क काफी सक्रिय होता है और गीता ने जो जानकारी दी है उस आधार पर जीआरपी पुलिस गीता के परिवार और उस स्थान को ढूंढने का प्रयास करेगी तो इससे एक उम्मीद की रोशनी नजर आती है कि जीआरपी पुलिस की मदद से गीता का परिवार मिल जाए।

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