मुस्लिम युवक ने रोजा तोड़कर बचाई महिला की जान, कहा- ये है अल्लाह की सच्ची इबादत

रोजा तोड़ जीवन बचाने वाले अकील को मिल रही है दुआएं

रमजान का महीना सवाब (पुण्य) का महीना होता है। इसे पवित्र माना जाता है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग निर्धारित नियम से रोजा रखते हैं और दान भी करते हैं। कैसी भी परिस्थिति हो, रोजा तोड़ा नहीं जाता। लेकिन, जब किसी की जिन्दगी बचाने का सवाल हो तो रोजे से बड़ा जीवन होगा ही। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है उदयपुर के अकील मंसूरी ने। उन्होंने कोरोना पॉजिटिव को प्लाज्मा देने के लिए इस बार अपना पहला रोजा तोड़ दिया। उनके इस पुनीत कार्य के लिए उन्हें सभी दुआएं दे रहे हैं।

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दरअसल, उदयपुर जिले के ऋषभदेव कस्बे की कोरोना संक्रमित महिला को ए-पॉजिटिव प्लाज्मा की जरूरत थी और उदयपुर के किसी भी ब्लड बैंक में ए-पॉजिटिव प्लाज्मा उपलब्ध नहीं था। इस पर रक्तदाता युवा वाहिनी ने आग्रह किया और अकील मंसूरी ने अपना एंटीबॉडी टेस्ट करवाया। एंटीबॉडी पॉजिटिव आने पर जब उन्हें पता चला कि भूखे पेट प्लाज्मा डोनेशन नहीं कर सकते हैं तो ऊपरवाले से माफी मांग कर उन्होंने अपना बुधवार 14 अप्रैल को अपना पहला रोजा तोड़ा और मानवता को ऊपर रखकर प्लाज्मा दान किया।

अकील का कहना है कि किसी का जीवन बचाना अल्लाह की सच्ची इबादत है। उन्हें यह मौका मिला तो उन्हें रोजा तोड़ने का कोई मलाल नहीं हुआ बल्कि अल्लाह का शुक्रिया अदा किया कि वह किसी का जीवन बचाने में काम आ आए। इससे पहले भी अकील ने 3 बार प्लाज्मा और 17 बार ब्लड डोनेट किया है। वे रक्तदाता युवा वाहिनी के साथ जुड़े हुए हैं। रक्तदाता युवा वाहिनी के समर्पित युवा अब तक कई लोगों को ब्लड व प्लाज्मा उपलब्ध करवा चुकी है।

 

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