जानें- बिहार में कुर्सी पाने के लिए राजनीति पार्टियां क्या कर रही हैं, इनसे मिलेगी कड़ी टक्कर

पटना॥ आगामी बिहार विधानसभा इलेक्शऩ की सरगर्मी काफी तेज हो गई है। इस चुनाव में गठबंधन और महागठबंधन के अलावा यूडीए गठबंधन के प्रत्याशी भी मैदान में उतरेंगे। इसके लिए नेताओं का दौर शुरू हो चुका है। चुनाव आयोग ने 29 नवम्बर से पहले विधानसभा इलेक्शऩ कराने की बात कह दी है।

bihar assembly elections

पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी ने पांच प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। एनडीए और महागठबंधन में भी प्रत्याशी करीब-करीब तय हो चुके हैं, जल्द ही सीट और प्रत्याशियों की घोषणा हो जाएगी। जिले के सभी सातों विधानसभा क्षेत्र से 50 से अधिक निर्दलीय प्रत्याशी एवं अन्य छोटे-छोटे दलों के प्रत्याशी मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

चुनावी समीकरण के तहत जातीय और क्षेत्रीय समीकरण बैठाया जा रहा है। लेकिन इस वर्ष का चुनाव पिछले सभी चुनावों से कुछ अलग होगा। एक ओर कोरोना के कारण सभी दल अपने कार्यकर्ताओं से वर्चुअल माध्यम से मिल रहे हैं। इस चुनाव में सभी सीटों से बड़ी संख्या में युवा चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।

राजनीति का ग्लैमर बरकरार

बेगूसराय जिला में इस बार के विधानसभा इलेक्शऩ में युवाओं में चुनाव मैदान में उतरने का काफी उत्साह देखा जा रहा है। विभिन्न दलों के नेताओं के पुत्र सहित कई युवा नेताओं के नाम हवा में उछल रहे हैं या उछाले जा रहे हैं। ये ऐसे युवा हैं जो या तो विभिन्न राजनीतिक दलों में अनुभव लिए और राजनीति के ग्लैमर से प्रभावित हैं।

नेता के पुत्र और पौत्र तो राजनीति की विरासत पहले से संभालने को लेकर मैदान में उतर रहे हैं। बेगूसराय की राजनीतिक हस्ती भोला सिंह का पिछले साल और हाल ही में रामदेव राय के निधन से रिक्त सीट को लेकर जिले में युवाओं की राजनीतिक दावेदारी भी बढ़ी है।

भाजपा और कांग्रेस के अलावे राजद, जदयू, लोजपा, जाप, आप, प्लुरल्स और भाजजपा से युवा चुनाव मैदान में उतरने को लेकर अपनी दावेदारी जताने में लगे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सीपीआई ने देश के चर्चित युवा कन्हैया कुमार को बेगूसराय के मैदान में उतारकर जिले के युवाओं को चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता खोल दिया है।

युवा दावेदार मजबूती से चुनौती देंगे

जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में प्रमुख दलों के परंपरागत उम्मीदवारों को भी युवा दावेदार मजबूती से चुनौती दे रहे हैं पहली बार चुनाव मैदान में उतरने के लिए जी जान से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, दर्जनों युवाओं ने चुनावी शंखनाद भी कर दिया है। कई युवा पार्टियों को परख रहे हैं।

सीट की स्थिति क्लीयर नहीं होने के बावजूद दावेदारों की भरमार है। सबके अपने-अपने दावे हैं, पहुंच और पैरवी है, जाति है जाति का समीकरण है। दावेदारी के अपने-अपने तर्क हैं, अपनी-अपनी प्रतिबद्धता है। दल का टिकट मिल गया तो लड़ने में आसानी होगी, नहीं मिलने पर निर्दलीय भी मैदान में उतरेंगे ही।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *