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‘जब तक हमारे पास आखिरी गोली और आखिरी फौजी है, एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा’

नई दिल्ली॥ हिंदुस्तान में इस बार ऐसा गणतंत्र दिवस हुआ जब जम्मू कश्मीर में सिर्फ तिरंगा फहराया गया। इसी कश्मीर पर कब्जा करने आए पाकिस्तानी सेना और कबायलियों से भारत माता के जिस सपूत ने लोहा लिया था, वह थे परमवीर मेजर सोमनाथ शर्मा। देश के पहले परमवीर चक्र विजेता। ऐसा वीर… जिसकी रग-रग में बहादुरी थी।

जिसने अपने अंतिम मैसेज में कहा था, ‘दुश्मन हम से सिर्फ 50 गज के फासले पर है, हमारी तादाद न के बराबर है और हम जबरदस्त गोलाबारी से घिरे हैं…लेकिन एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा, जब तक हमारे पास आखिरी गोली और आखिरी फौजी है।’ उस समय उम्र थी सिर्फ 24 साल। आज कश्मीर के उस नायक को उनकी जयन्ती पर याद करते हुए ख्याल आता है…वह 97 साल के होते।

आज ही के दिन वर्ष 1923 में देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा का जन्म हिमाचल प्रदेश के छोटे से गांव डाढ़ के एक सैन्य परिवार में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा नैनीताल में और देहरादून के प्रिंस ऑफ वेल्स रॉयल मिलिट्री कॉलेज में उच्च शिक्षा हुई। 22 फरवरी वर्ष 1942 को उन्हें कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन मिला। उन्होंने 1947 में पाक से हुई जंग में हाथ में फ्रैक्चर के बाद भी हिस्सा लिया। 3 नवंबर 1947 को दुश्मन से लोहा लेते हुए मेजर सोमनाथ बडगाम में शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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सैन्य पृष्ठ भूमि और विरासत में मिले वीरता के गुण ही थे कि दुश्मन देश कश्मीर को नहीं ले पाया। मलाल सिर्फ इतना है कि मेजर शर्मा के घर डाढ में ही सरकारें आज तक उनका स्मारक तक नहीं बना सकीं। शहीद के पिता ने बेटे को मिला परमवीर चक्र 26 जनवरी 1950 को 26 जनवरी पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के हाथों प्राप्त किया था। परमवीर चक्र की घोषणा बेशक 1947 में की गई थी लेकिन वह समय विक्टोरिया क्रॉस का था।

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