सावधान! कहीं आप भी तो नहीं घर से मच्छरों को भगाने के लिए करते हैं ये काम

नई दिल्ली: गर्मी के बाद बारिश का मौसम आने के साथ ही मच्छरों का आंतक भी शुरू हो जाता है। चाहे घर के कोने हो या पनि हर जगह मच्छर जबरदस्त तरीके से आक्रमण करते हैं। यही मच्छर मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारियां का कारण भी बनते हैं। इस समस्या का समाधान पाने के लिए ज्यादातर घरों में मच्छर भगाने वाली क्वॉइल, अगरबत्ती या इलेक्ट्रिक रीफिल मशीन उपयोग में लाई जाती है। कुछ समय के लिए इन खतरनाक मच्छरों से तो हमें छुटकारा मिल जाता है, लेकिन इसके बाद में होने वाले कुप्रभावों के बारे में नहीं सोचते है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों का धुआं न सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि इनसे कैंसर भी हो सकता है। आइए जानते है इस धुएं से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में-

चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन की रिसर्च में यह बात पता चली है की इन मच्छर भगाने वाली क्वॉइल में कैंसर पैदा करने वाले कई सारे गुण होते है। यही नहीं चीन और ताइवान में हुए स्टडी में भी यह बात सामने आई है की इस धुएं हा सीधा कनेक्शन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से है। एक क्वॉइल का घर में जलाना 100 सिगरेट पीने के समान होता है। इसमें पाया जाने वाला पदार्थ फेफड़ों को बहुत नुकसान पहुंचाता है।

मार्केट में अब नो स्मोक क्वॉइल भी मिलती है हालांकि इनमें धुआं तो नहीं होता लेकिन कार्बन मोनोऑक्साइड बहुत अधिक मात्रा में निकलता है। यह फेफड़ों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते है। यही नहीं मच्छर भगाने के लिए जो लिक्विड मशीन आती हैं यह भी फेफड़ों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाती है। क्योंकि जब हम बंद कमरे में लगातार इसको इन्हेल करते है तो यह हमारे फेफड़ों को डैमेज कर देती है।