Basant Panchami : मां सरस्वती की आराधना का पर्व, जानें शुभ मुहुर्त और पूजा विधि

बसंत पंचमी सनातन मतावलंबियों का प्रमुख पर्व है। इसे श्रीपंचमी भी कहा जाता है। यह त्योहार प्रति वर्ष माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

बसंत पंचमी सनातन मतावलंबियों का प्रमुख पर्व है। इसे श्रीपंचमी भी कहा जाता है। यह त्योहार प्रति वर्ष माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ब्रह्माजी के मुख से ज्ञान की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इस कारण बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पर्व का शिक्षा और संगीत के क्षेत्र से जुड़े लोग साल भर प्रतीक्षा करते हैं। लोक मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की आराधना करने से ज्ञान में वृद्धि होती है। इस दिन मां सरस्वती को पीले रंग के भोग और फूल अर्पित किए जाते हैं। भारत के पूर्वी प्रांतों में तो इस दिन घरों में देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। अगले दिन मूर्ति को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।

Mother Saraswati

भारतीय पंचांग के अनुसार इस वर्ष 16 फरवरी को सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर पंचमी तिथि आरंभ होगी और इसका समापन 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर होगा। इस दिन रेवती नक्षत्र रहेगा और चंद्रमा मीन राशि में मौजूद रहेगा। बसंत पंचमी के लिए यह विशेष शुभ माना जाता है। बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले की जाती है। शिक्षा प्रारंभ करने या किसी नई कला की शुरूआत करने के लिए यह दिन शुभ माना जाता है।

पीले वस्त्र धारण कर मां सरस्वती की पूजा करें

बसंत के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान कर पीले वस्त्र धारण कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके मां सरस्वती की पूजा की शुरुआत करना चाहिए। पीला वस्त्र बिछाकर उस पर मां सरस्वती को स्थापित करना चाहिए। रोली, मौली, केसर, हल्दी, चावल, पीले फूल, पीली मिठाई, मिश्री, दही और हलवा आदि चीजें प्रसाद के रूप में मां सरस्वती के चित्र या मूर्ति के पास रखें। मां सरस्वती को श्वेत चंदन और पीले व श्वेत पुष्प दाएं हाथ से अर्पण करना चाहिए। इसके बाद पूरी तरह से एकाग्र होकर हल्दी की माला से मां सरस्वती के मूल मंत्र ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः का जाप करना चाहिए।

कोई भी नया काम प्रारम्भ करना भी शुभ माना जाता

वसंत पंचमी के दिन कोई भी नया काम प्रारम्भ करना भी शुभ माना जाता है। जिन व्यक्तियों को गृह प्रवेश के लिए कोई मुहूर्त ना मिल रहा हो वह इस दिन गृह प्रवेश कर सकते हैं या फिर कोई व्यक्ति अपने नए व्यवसाय को आरम्भ करने के लिए शुभ मुहूर्त को तलाश रहा हो तो वह वसंत पंचमी के दिन अपना नया व्यवसाय आरम्भ कर सकता है। इसी प्रकार अन्य कोई भी कार्य जिनके लिए किसी को कोई उपयुक्त मुहूर्त ना मिल रहा हो तो वह वसंत पंचमी के दिन वह कार्य कर सकता है।

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