बंगाल में बड़ा सियासी उठापटक, मंत्री और विधायक पहुंचे दिल्ली, क्या जाएगी ममता सरकार?

गुरुवार को एक तरफ राज्य में सबसे बड़ा जनाधार रखने वाले मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है तो दूसरी ओर उनके समर्थक विधायक मिहिर गोस्वामी भी ममता का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल होने के लिए दिल्ली चले गए हैं। 

कोलकाता। विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही भाजपा की राह लगातार आसान होती जा रही है। गुरुवार को एक तरफ राज्य में सबसे बड़ा जनाधार रखने वाले मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है तो दूसरी ओर उनके समर्थक विधायक मिहिर गोस्वामी भी ममता का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल होने के लिए दिल्ली चले गए हैं।
Modi in Mamta tension
भाजपा सूत्रों के अनुसार भाजपा सांसद निशिथ प्रमाणिक के साथ मिहिर गोस्वामी दिल्ली गए हैं। वह रविवार अथवा सोमवार तक भाजपा की सदस्यता ले लेंगे। कूचबिहार दक्षिण से विधायक मिहिर गोस्वामी पिछले कई दिनों से तृणमूल कांग्रेस से नाराज चल रहे थे। वह लगातार फेसबुक पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल की कार्यशैली के खिलाफ सवाल खड़ा कर रहे थे। एक दिन पहले ही उन्होंने लिखा था कि वह 22 सालों से तृणमूल कांग्रेस में हैं लेकिन उनकी लगातार अनदेखी और अपेक्षा की गयी है। अब वह तृणमूल में बिल्कुल भी बने रहना नहीं चाहते हैं और हर तरह का संबंध तोड़ देना चाहते हैं। उसके ठीक एक दिन बाद जब वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं तो माना जा रहा है कि इससे ममता बनर्जी की मुश्किलें और अधिक बढ़ेगी।
खास बात यह है कि गोस्वामी राज्य कैबिनेट में परिवहन मंत्री रहे शुभेंदु अधिकारी के करीब विधायकों में से एक रहे हैं। गुरुवार को ही शुभेंदु ने मंत्री पद छोड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह भी भाजपा में शामिल होंगे। जबकि दूसरी और गोस्वामी दिल्ली रवाना हो हुए हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये दोनों ही रणनीति सोच समझ कर बनाई गई थी।
उल्लेखनीय है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के 18 सीट जीतने के बाद अपनी सरकार बचाए रखने के लिए ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर को अपना राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया है। किशोर की संस्था आई-पैक के कर्मचारी राज्य भर में जा रहे हैं और पार्टी के नेताओं मंत्रियों विधायकों और सांसदों से उनके काम का ब्यौरा मांग रहे हैं जिसे लेकर कई विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि एक राजनीतिक रणनीतिकार की संस्था के लोग काम का हिसाब लें, यह अपमान है। मिहिर गोस्वामी ने भी इसे लेकर सवाल खड़ा किया था और मुख्यमंत्री से पूछा था कि जिस तृणमूल का दामन उन्होंने थामा था क्या यह वही तृणमूल है?

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