बिहार में सफर करना हुआ महंगा! नीतीश सरकार ने लागू की नई टोल नीति, जानें प्रति किमी कितनी ढीली होगी जेब
बिहार के नीतिश कुमार सरकार ने राज्य में सफर करने वाले वाहन चालकों को एक बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए नई टोल नीति (New Toll Policy) को पूरे सूबे में लागू कर दिया है। इस नए नियम के तहत अब बिहार के स्टेट हाईवे (SH), प्रमुख पुलों, बाईपास और सुरंगों (Tunnels) से गुजरने पर वाहन चालकों को अपनी जेब ढीली करनी होगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल राज्य की सड़क परियोजनाओं के रखरखाव, मरम्मत और परिवहन सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए किया जाएगा।
सड़क की चौड़ाई तय करेगी आपकी जेब का बोझ
बिहार सरकार की इस नई टोल नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब टोल टैक्स की दरें सड़क की चौड़ाई के आधार पर तय की जाएंगी। अगर आप फोर लेन (4-Lane) या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर सफर कर रहे हैं, तो आपको तय की गई पूरी टोल दर का भुगतान करना होगा। वहीं, अगर सड़क दो लेन से अधिक लेकिन फोर लेन से कम चौड़ी है, तो वहां निर्धारित दर से थोड़ा कम प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा, 5.5 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए एक अलग रेट लिस्ट तैयार की गई है। सरकार जल्द ही उन सभी रूटों, पुलों और बाईपास की फाइनल लिस्ट जारी करेगी जहां टोल प्लाजा एक्टिव किए जाएंगे।
लंबे पुलों से गुजरने पर लगेगा विशेष फॉर्मूला
बिहार में नदियों का जाल बिछा है और इस वजह से यहां कई बड़े और लंबे पुल हैं। नई नीति में पुलों से गुजरने वाले वाहनों के लिए एक खास गणना प्रणाली (Calculation Formula) तैयार की गई है। नए नियम के मुताबिक, पुलों पर टोल की गणना सिर्फ सड़क की सामान्य दूरी के आधार पर नहीं होगी, बल्कि पुल की कुल लंबाई को एक विशेष फॉर्मूले के तहत जोड़कर टैक्स निकाला जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि जेपी सेतु, गंडक पुल या कोसी नदी पर बने लंबे पुलों को पार करने के लिए वाहन चालकों को सामान्य सड़कों के मुकाबले अधिक टोल टैक्स चुकाना पड़ सकता है।
इन वाहनों को सरकार ने दी बड़ी राहत
हालांकि, इस नई नीति में आम लोगों और किसानों की सहूलियत का भी ध्यान रखा गया है। बिहार सरकार ने कुछ विशेष श्रेणी के वाहनों को पूरी तरह से टोल टैक्स से मुक्त रखा है। नई व्यवस्था के तहत दोपहिया वाहन (Bike/Scooter), तिपहिया वाहन (Auto/E-Rickshaw), ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और बैलगाड़ी या पशु-चालित वाहनों से कोई टोल टैक्स नहीं वसूला जाएगा। लेकिन ध्यान रहे, नियमों में यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई विशेष परिस्थिति या कमर्शियल उपयोग होता है, तो इन वाहनों के लिए भी अलग से प्रावधान लागू किए जा सकते हैं।
फास्टैग अनिवार्य, बिना इसके लगेगा भारी जुर्माना
टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम से निजात पाने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल रखा गया है। सभी वाहन चालकों को टोल राशि का भुगतान अनिवार्य रूप से फास्टैग (FASTag) या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ही करना होगा। अगर कोई वाहन चालक बिना फास्टैग के टोल लेन में घुसता है या गाड़ी ओवरलोड पाई जाती है, तो उसे पेनाल्टी के साथ अतिरिक्त भारी शुल्क चुकाना पड़ेगा। वहीं, रोजाना या नियमित रूप से सफर करने वाले लोकल वाहन मालिकों के लिए मंथली पास और विशेष रियायती (Discount) योजनाओं की व्यवस्था भी की जा रही है।
गाड़ी के हिसाब से नोट कर लें नया टोल रेट
सरकार ने वाहनों के एक्सल और साइज के हिसाब से प्रति किलोमीटर की दरें तय कर दी हैं, जो इस प्रकार हैं:
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कार, जीप, वैन और हल्के निजी वाहन: ₹1.25 प्रति किलोमीटर
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हल्के व्यावसायिक वाहन (LCV) / मिनी बस: ₹2.00 प्रति किलोमीटर
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2-एक्सल बस और ट्रक: ₹4.25 प्रति किलोमीटर
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3-एक्सल कमर्शियल वाहन: ₹4.60 प्रति किलोमीटर
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6-एक्सल भारी निर्माण मशीनरी/वाहन: ₹6.65 प्रति किलोमीटर
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7 या उससे अधिक एक्सल वाले भारी मालवाहक वाहन: ₹8.10 प्रति किलोमीटर