बिहार : सीटें जरूर घटीं पर नहीं घटा नीतीश का रुतबा, सारे अहम विभाग JDU के पास

जैसे पिछली सरकार में जेडीयू के पास सारे अहम और भारी भरकम मंत्रालय थे. इस बार भी सारे अहम और भारी भरकम मंत्रालय जेडीयू ने एक बार फिर अपने पास रखे हैं. भाजपा के पास जो विभाग पहले थे वो ही इस बार भी मिले हैं. 

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में भले ही जेडीयू की सीटें कम हो गई हैं लेकिन नीतीश कुमार का रुतबा अभी भी पहले की ही तरह है. दरअसल इसका अंदाजा आप आज मंगलवार को हुए मंत्रियों के विभागों का बंटवारे के जरिए खुद ही लगा सकते हैं. जैसे पिछली सरकार में जेडीयू के पास सारे अहम और भारी भरकम मंत्रालय थे. इस बार भी सारे अहम और भारी भरकम मंत्रालय जेडीयू ने एक बार फिर अपने पास रखे हैं. भाजपा के पास जो विभाग पहले थे वो ही इस बार भी मिले हैं.

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पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के पास जो मंत्रालय थे, उन्हीं विभागों को अब मौजूदा उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को दिए गए हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास गृह मंत्रालय, सामान्य प्रशासन, विजिलेंस समेत वह विभाग रखें हैं, जिन्हें अन्य मंत्रियों को आवंटित नहीं किया गया है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण गृह और सामान्य प्रशासन हैं. हालांकि, माना जा रहा था कि गृह विभाग पर बीजेपी अपनी दावेदारी कर सकती है, पर नीतीश ने उसे अपने पास रखा है. इस तरह से नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक रुतबे को पहले की तरह ही बरकरार रखने की कोशिश की है जबकि लग रहा था कि इस बार उनका सियासी कद कम हो सकता है.

जेडीयू कोटे से मंत्री बने विजय चौधरी को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन, सूचना और प्रसारण और संसदीय कार्य विभाग का जिम्मा मिला है. पिछली सरकार में विजय चौधरी विधानसभा अध्यक्ष थे और उन्हें जिन मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है वो सभी विभाग जेडीयू खेमे के मंत्रियों के पास थे. पिछली सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय श्रवण कुमार के पास था जबकि सूचना विभाग अशोक चौधरी देख रहे थे.

जेडीयू कोटे से एक बार फिर नीतीश सरकार में मंत्री बने बिजेंद्र यादव को पिछली सरकार की तरह ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा उन्हें निषेध, योजना और खाद्य एवं उपभोक्ता मामले का मंत्रालय का जिम्मा भी सौंपा गया है. जेडीयू खेम से मंत्री बनने वाले अशोक चौधरी को पहले की तरह ही भवन निर्माण मंत्रालय दिया गया है, लेकिन साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण, साइंस टेक्नोलॉजी और सोशल वेल्फेयर मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

जेडीयू से पहली बार मंत्री बने मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्रालय दिया गया है जबकि पिछली सरकार में यह विभाग जेडीयू के कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा के पास था, लेकिन इस बार वो चुनाव हार गए हैं. ऐसे में मेवालाल चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, शीला कुमार को परिवहन मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है जो कि पिछली सरकार में संतोष कुमार निराला के पास था. इस बार चुनाव में संतोष निराला हार गए हैं.

वहीं, नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद को वित्त, कॉमर्शियल टैक्स, पर्यावरण और वन, आपदा प्रबंधन, शहरी विकास के साथ सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है. नीतीश के सरकार में इन विभागों की जिम्मेदारी सुशील मोदी के पास थी.

वहीं, बीजेपी कोटे से दूसरी डिप्टी सीएम रेणु देवी को पंचायती राज, पिछड़ी जाति का उत्थान और ईबीसी कल्याण के साथ उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है. पिछली नीतीश सरकार में पंचायती विभाग बीजेपी के कपिल देव कामत और पिछड़ी जाति का उत्थान ईबीसी कल्याण विभाग बीजेपी के विनोद सिंह संभाल रहे थे.

बीजेपी के पुराने चेहरों में मंत्री बनने वालों में मंगल पांडेय एकलौते नेता हैं, जिन्हें एक बार फिर अपने पुराने विभाग स्वास्थ्य मंत्रालय और सड़क एंव परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है. नीतीश की पिछली सरकार में भी स्वास्थ्य विभागों की जिम्मेदारी वो संभाल रहे थे जबकि सड़क मंत्रालय नंद किशोर यादव के पास था. हालांकि, इस बार उन्हें कला एवं संस्कृति मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मा मिला है.

वहीं, पहली बार मंत्री बने बीजेपी के अमरेंद्र सिंह को कृषि, कोऑपरेटिव और गन्ना विभाग का प्रभार मिला है. पिछली सरकार में इन विभागों की जिम्मेदारी राणा रणधीर सिंह और प्रेम सिंह संभाल रहे थे. रामप्रीत पासवान को PHED यानी पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग विभाग दी गई, जो कि पिछली सरकार में विनोद कुमार झा के पास था. जीवेश कुमार को पर्यटन, श्रम और खनन मंत्रालय का जिम्मा मिला जबकि पिछली सरकार में श्रम विभाग बीजेपी के विजय कुमार सिन्हा और पर्यटन कृष्ण कुमार ऋषि के पास था.

रामसूरत राय को राजस्व और कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है. नीतीश कुमार की पिछली सरकार में कानून मंत्रालय जेडीयू के नरेंद्र नारायण यादव और राजस्व विभाग बीजेपी के रामनारायण मंडल के पास था. वहीं, जीतनराम मांझी के बेटे संतोष मांझी को लघु सिंचाई के साथ अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण विभाग का जिम्मा दिया गया है. नीतीश की पिछली सरकार में ये विभाग जेडीयू खेमे के मंत्रियों के पास थे. वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी को पशुपालन और मत्स्य मंत्रालय मिला है. यह दोनों विभाग पिछली सरकार में बीजेपी के बृजकिशोर बिंद के पास था.

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