बसपा ने योगी और केशव मौर्या के समाने उतारा मुस्लिम कैंडिडेट, समझें रणनीति

BJP ने प्रदेश में नंबर वन और नंबर दो चेहरे यानी सीएम योगी एवं उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को चुनावी मैदान में उतारा है। इनके विरूद्ध विपक्षी दलों के प्रत्याशियों पर हर किसी की नजर बनी हुई थी। अखिलेश ने योगी के विरूद्ध सुभावती शुक्ल को प्रत्याशी बनाया तो केशव प्रसाद मौर्य के विरूद्ध अनुप्रिया पटेल की बहन पल्लवी पटेल को चुनावी रणभूमि में उतारा। किंतु, सबसे बड़ा खेल BSP अध्यक्ष मायावती ने कर दिया।

उन्होंने BJP के दोनों टॉप चेहरों के विरूद्ध मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है। इसका सीधा संदेश एक वर्ग विशेष को देने की कोशिश की जा रही है। बसपा अध्यक्ष अपने वोट बैंक को मजबूत करने के साथ-साथ एक वर्ग विशेष पर सबसे अधिक भरोसा जताने का संदेश देने में सफल होती दिख रही हैं।

मुस्लिम मतदाताओं को अपनी तरफ लाने का प्रयास

उत्तर प्रदेश इलेक्शन में मुस्लिम मतदाता किस तरफ जाता है, यह तो 10 मार्च को आने वाला चुनाव रिजल्ट ही बताएगा। किंतु, इस बार यूपी के सियासी मैदान में इस वोट बैंक के कई दावेदार उभर कर सामने आ गए हैं। मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए मायावती ने ऐसा फैसला लिया है।

दो बड़े नेताओं के विरूद्ध मुस्लिम प्रत्याशी

बसपा ने BJP के यूपी के सबसे बड़े नेता और सीएम योगी के विरूद्ध ख्वाजा शम्सुद्दीन को चुनावी रणभूमि में उतारा है। ख्वाजा शम्सुद्दीन लगभग 20 सालों से BSP से जुड़े हैं। पहली बार उन्हें गोरखपुर सदर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं, सिराथु से केशव प्रसाद मौर्य के विरूद्ध मुनसब अली को चुनावी मैदान में उतारा गया है। इसके जरिए BSP प्रमुख मायावती ने यूपी के चुनावी मैदान में बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। वह संदेश है, मुस्लिम वोट बैंक पर भरोसा।