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ठंड में बढ़ जाती है एलर्जी अटैक की संभावनाएं, जानिए लक्षण और बचाव का तरीका

ठंड का मौसम तो वैसे सबको भाता है और भाए भी क्यों नहीं अलग-अलग पकवान के साथ घूमने फिरने का मज़ा भी दोगुना हो जाता है. लेकिन इसके साथ-साथ बिमारियों की भी संभावनाए ठंडक में बढ़ जाती है. कुछ बच्चों के शरीर पर रेशे निकल जाते हैं, उल्टी के साथ ही सांस लेने में तकलीफ शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में कभी कभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती करवा कर इलाज दिया जाता है।


बता दें कि डॉक्टरों के अनुसार ठंड के मौसम में ऐसे लक्षण कई लोगों में नजर आ सकते हैं। ठंड में एलर्जी आम बात है। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं- बार-बार छींक आना, नाक बहना, आंख, नाक और गले में खुजली, लेकिन ज्यादातर लोग इन लक्षणों को सामान्य सर्दी समझने की गलती कर बैठते हैं।

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सर्दी के मौसम में इसलिए होती है एलर्जी

गौरतलब है कि ठंड से बचने के लिए हर कोई व्यक्ति अधिकांश समय घर या ऑफिस में बिताता है। यही आदत एलर्जी का कारण बनती है। इसे इनडोर एलर्जी कहा जाता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी के अनुसार, इनडोर एलर्जी के सबसे सामान्य कारण हैं – हवा में मौजूद धूल के कण, इनडोर मोल्ड (फफूंद), पालतू जानवरों की रूसी (त्वचा के गुच्छे) और कॉकरोच ड्रॉपिंग।

धूल के कण: ये गर्म और नम वातावरण में पनपते हैं तथा बिस्तर, कालीन और फर्नीचर में पाए जाते हैं।
पेट डैंडर – यह मृत त्वचा के गुच्छे होते हैं जो धूल में मिल जाते हैं और बिस्तर, कालीन जैसी कई सतहों पर चिपक जाते हैं।
फफूंद – बाहर का नम मौसम बाथरूम और घर के ऐसे स्थान जहां रोशनी नहीं पहुंचती है, में फफूंद को बढ़ावा देता है।
कॉकरोच- बाहर का ठंडा मौसम कॉकरोच को घर के अंदर ले जाता है, जहां वे मुख्य रूप से रसोई की अलमारियाँ या सिंक के नीचे प्रजनन करना शुरू करते हैं।

डॉ.के अनुसार, दवाओं से भी एलर्जी होती है। खाद्यनपदार्थों के सेवन में भी सावधानी बरतना चाहिए। संपर्क में आने से भी चर्मरोग होते हैं तो सर्दियों में गंभीर हो सकते हैं।

सर्दी की एलर्जी के लक्षण
छींक आनात्वचा के लाल चकत्ते
बहती नाक
खुजली गले, कान और आंख
सांस लेने में परेशानी
सूखी खांसी
लगातार बुखार रहना
बीमार महसूस करना

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एलर्जी बढ़ने पर तेजी से सांस लेने, चिंता, थकावट, घबराहट और सीने में जकड़न जैसे लक्षण हो सकते हैं।

ऐसे करें सर्दी और एलर्जी में फर्क
विंटर एलर्जी तब होती है जब शरीर हिस्टामाइन नामक कैमिकल रिलीज करता है। यह एलर्जी भड़कती है। ऐसा सालभर में कभी भी हो सकता है और लक्षण कई दिनों तक रह सकते हैं।
दूसरी ओर, वायरस के अटैक के कारण भी ठंड लग सकती है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता, खांसता या बात करता है, तो ये वायरस हवा में छोटी बूंदों के माध्यम से फैलते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं
यदि एलर्जी के लक्षण एक सप्ताह से अधिक समय तक रहते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श करें। डॉक्टर लक्षणों के बारे में पूछेंगे और एलर्जी का टेस्ट करते हैं। जांच के ऐसे आधुनिक तरीके मौजूद हैं, जो एक ही बार में 40 से अधिक तरह की एलर्जी की जांच कर सकते हैं जैसे – धुल के कणों, पालतू जानवरों की रूसी, मोल्ड के कारण होने वाली एलर्जी।

एलर्जी से बचना है तो बरतें ये सावधानियां –

– घर के अंदर नमी को कम करने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। आर्द्रता का स्तर लगभग 30% से 50% होना चाहिए।
– कपड़े, बिस्तर आदि को नियमित रूप से धोएं ताकि धूल के कण कम हो सकें।
– रोजाना वैक्यूम करें।अपने या पालतू जानवरों के खाने के बाद बचे हुए भोजन को हटाकर जगह को साफ रखें।
– नमी को रोकने के लिए अपने बाथरूम, तहखाने या छत में लीक को ठीक करें।
– पालतू जानवरों की रूसी को कम करने के लिए उनको सप्ताह में एक बार नहलाएं।
– खिड़कियों, दरवाजों, दीवारों या किचन की अलमारियों में दरारों भर दें जहां कीड़े आसानी से घर बना सकते हैं।
– मोल्ड को बनने से रोकने के लिए अपनी रसोई और बाथरूम को सूखा रखें।

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