चीन ने भारत से कहा- इस देश पर मत फूलों, कभी नहीं करेगा तुम्हारी मदद

नई दिल्ली॥ बीते दिनों पैंगांग झील के दक्षिणी तट पर दोनों देशों के सैनिकों का टकराव हुआ था जिसमें बीस हिंदुस्तानीय सैनिक मारे गए थे उसके बाद से ये क्षेत्र चीन के नियंत्रण में है। हिंदुस्तान प्रयास कर रहा है कि इस इलाक़े को नया विवादित इलाक़ा बना दे। हिंदुस्तान दरअस्ल सीमावर्ती इलाक़े में स्थिरता मज़बूत करने के बजाए आक्रामक रुख़ अपनाने पर तुला हुआ है।

CHINA

हालांकि हिंदुस्तान इस समय अपनी आंतरिक परेशानियों में उलझ गया है। कोविड-19 संकट तो हिंदुस्तान के कंट्रोल से बाहर निकल चुकी है। अर्थ व्यवस्था का बहुत बुरा हाल है। इन हालात में बॉर्डर पर विवाद को हवा देकर हिंदुस्तान सरकार आंतरिक समस्याओं से जनता का ध्यान हटाना चाहती है।

हिंदुस्तान को याद रखना चाहिए कि उसका सामना शक्तिशाली चीन से है और यदि टकराव हुआ तो हिंदुस्तान को 1962 से अधिक नुक़सान उठाना पड़ेगा। हिंदुस्तान को न तो अमरीका की सहायता पर भरोसा करना चाहिए और न ही खुद इतराना चाहिए। विवादित मुद्दों को चीन हिंदुस्तान बातचीत से हल किया जाना चाहिए।

पैंगांग झील के पास टकराव से लगता है कि हिंदुस्तान ने गालवान घाटी में हुई झड़प से सबक़ नहीं लिया है। चीन को सीमा पर संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। विवाद को वार्ता से हल करने का प्रयास ज़रूर होना चाहिए लेकिन अगर हिंदुस्तान अड़ियल रवैया अपनाए तो फिर चीन को नर्मी नहीं दिखानी चाहिए। चीन को ये हमेशा सुनिश्चित रखना चाहिए कि वह जब चाहे हिंदुस्तान से जीत सकता है।

अमेरिका ने कही करेगा मदद

चीन की पॉवर हिंदुस्तान से कई गुना अधिक है हिंदुस्तान चीन के मुक़ाबले में कहीं नहीं टिकता। हमें हिंदुस्तान की इस ग़लत फ़हमी को ध्वस्त कर देना होगा कि वह अमरीका जैसे किसी देश के साथ मिलकर चीन से टकरा सकता है। अगर वो सोच रहा है कि अमेरिका उसकी मदद करेगा तो ऐसा बुल्किल भी ना सोचे।

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