बड़ी खबर: भारत में गहराता जा रहा ये संकट, सरकार अलर्ट, कहीं यूरोप-चीन जैसा ना हो हाल

देश के कोयला संचालित स्टेशन्स में ईंधन की भयंकर कमी आ गई है. वहीं, सरकार भी स्थिति को असामान्य और अनिश्चित बता रही है.

कोरोना वायरस के प्रकोप से देश अभी उभर ही रहा है तब तक एक और बड़ा संकट आता हुआ दिखाई दे रहा है. आपको बता दें कि देश की पर ‘कोयला संकट’ का खतरा मंडरा रहा है. देश के कोयला संचालित स्टेशन्स में ईंधन की भयंकर कमी आ गई है. वहीं, सरकार भी स्थिति को असामान्य और अनिश्चित बता रही है. भारत में करीब 70 फीसदी बिजली का उत्पादन कोयला से चलने वाले स्टेशन में होता है.

हालांकि, भारत ही नहीं यूरोप, चीन में कई जगहों पर ऊर्जा का संकट बढ़ रहा है. वहीँ एक अखबार से बातचीत में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने इस किल्लत को मानसून के बाद होने वाली कमी से सामान्य से परे बताया है. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि मैं अगले 5-6 महीनों में सहज हो पाऊंगा या नहीं… आमतौर पर अक्टूबर के मध्य में मांग में कमी आने लगती है…जब मौसम ठंडा होने लगता है… लेकिन हालात अनिश्चित होते जा रहे हैं.’

संकट को दूर करने के लिए उनकी टीम लगातार काम कर रही

ऊर्जा मंत्री ने आगे कहा, ‘मुझे नहीं पता मैं सुरक्षित हूं… अगर आपके पास तीन से भी कम स्टॉक के साथ 40-50 हजार मेगावाट (थर्मल कैपेसिटी) हो, तो आप सुरक्षित नहीं हो सकते.’रिपोर्ट के अनुसार, हर रोज निगरानी किए जा रहे 104 थर्मल प्लांट्स में से 14,875 मेगावाट की क्षमता वाले 15 स्टेशन में 30 सितंबर को एक भी दिन का स्टॉक नहीं बचा था. जबकि, 52,530 मेगावाट वाले 39 स्टेशन में तीन दिन से भी कम का स्टॉक था. इसके अलावा कोयला नहीं होने से 6,960 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट में काम रुक गया है.

हालांकि, मंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि इस संकट को दूर करने के लिए उनकी टीम लगातार अन्य मंत्रालयों के साथ काम कर रही है. मानसून के बाद मांग में इजाफा और आपूर्ति में कमी के अलावा अप्रैल-जून 2021 में स्टॉक की कमी भी संकट का बड़ा कारण है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोयला की कीमत बढ़ने के कारण आयात में भी भारी गिरावट हुई थी. आमतौर पर भारत में अक्टूबर में बिजली का इस्तेमाल सबसे ज्यादा दर्ज किया जाता है.

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