रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सावरकर पर बोला बड़ा झूठ, ओवैसी ने आरोप लगाते हुए दी दलील

सावरकर ने जेल जाने के सिर्फ 6 महीने बाद 1911 में पहली याचिका लिखी थी। गांधी तब दक्षिण अफ्रीका में थे। सावरकर ने 1913/14 में फिर से लिखा। गांधी की सलाह उन्हें 1920 से मिला।

एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है, आपको बता दें कि उन्होंने बुधवार को कहा कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने झूठ बोला कि महात्मा गांधी के अनुरोध पर सावरकर ने अंग्रेजों को माफीनामा लिखकर दिया था। हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ओवैसी ने सिलसिलेवार ट्वीटों के जरिए राजनाथ सिंह के दावे पर विवाद खड़ा किया।

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वहीँ ओवैसी ने 25 जनवरी, 1920 के पत्र को ‘द कलेक्टेड वर्क्‍स’ में प्रकाशित हिस्से को टैग करते हुए लिखा, “गांधी का यह पत्र सावरकर को मिला। ब्रिटिशों से उदारता, दया और ताज के वफादार सेवक होने का वादा करने वाली याचिका का कोई उल्लेख नहीं है।” वहीँ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष ने बताया कि सावरकर ने जेल जाने के सिर्फ 6 महीने बाद 1911 में पहली याचिका लिखी थी। गांधी तब दक्षिण अफ्रीका में थे। सावरकर ने 1913/14 में फिर से लिखा। गांधी की सलाह उन्हें 1920 से मिला।

सावरकर सीमित बौद्धिक कौशल वाले व्यक्ति

आपको बता दें कि सांसद ने पूछा, “क्या यह झूठ है कि इस ‘वीर’ ने तिरंगे को खारिज कर दिया और भगवा को हमारे झंडे के रूप में देखना चाहते थे?”ओवैसी ने लिखा, “कल अपने भाषण में आपने जिक्र किया था कि सावरकर ने हिंदू को किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया था जिसके लिए भारत जन्मभूमि या मातृभूमि थी। हालांकि, सावरकर, सीमित बौद्धिक कौशल वाले व्यक्ति के रूप में, वास्तव में हिंदू को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया था जिसके लिए भारत पितृभूमि और पवित्र भूमि थी।”

वहीँ “उनके विचार में, भारत मुसलमानों और ईसाइयों के लिए पवित्र भूमि नहीं था और इसलिए वे भारत के प्रति पूरी तरह से वफादार नहीं हो सकते थे। रक्षामंत्री के रूप में इस पर आपका क्या विचार है? क्या आप इस सिद्धांत की सदस्यता लेते हैं?” ओवैसी ने मांग की कि जिसने भी राजनाथ सिंह के लिए यह भाषण लिखा है, उसे यह कहते हुए निकाल दिया जाना चाहिए कि ऐसे सलाहकारों का होना अच्छा नहीं है, जिनका सच्चाई से ‘सावरकरी संबंध’ है।

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