क्या आप जानते हैं कि किन्नरों में मौत के बाद खुशी मनाई जाती है, जानिए इसके पीछे का कारण

नई दिल्ली: ट्रांसजेंडर्स को हमारे समाज में थर्ड जेंडर यानी ‘थर्ड जेंडर’ का दर्जा प्राप्त है। हम सभी ने देखा है कि उनका जीवन हमारी तरह सामान्य नहीं है। उनका रहन-सहन, रहन-सहन सब कुछ अलग है। शायद आपको इनकी रहस्यमयी दुनिया के बारे में पता भी नहीं होगा तो आज हम आपको इनकी दुनिया से रूबरू कराएंगे जहां कई तरह के रिवाज हैं।

क्या आप जानते हैं कि जन्म से लेकर मृत्यु तक इनके अलग-अलग नियम होते हैं। जी हाँ, आपने इनके जन्म की खबर देखी होगी या इन घटनाओं से वाकिफ होंगे लेकिन क्या आपने कभी किसी किन्नर की अंतिम संस्कार की बारात देखी है..? जहां ज्यादातर शवों को दिन में बाहर निकाला जाता है, वहीं रात में किन्नरों के अंतिम संस्कार की बारात निकाली जाती है।

दरअसल, किन्नरों के अंतिम संस्कार की बारात रात में निकाली जाती है ताकि कोई भी इंसान उनकी अंतिम संस्कार की बारात न देख सके. किन्नर समाज में ऐसा ही रिवाज रहा है। इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि इस अंतिम संस्कार में अपने समुदाय के अलावा अन्य समुदायों के किन्नरों को शामिल नहीं होना चाहिए।

ये लोग किन्नर समाज में किसी की मृत्यु पर शोक बिल्कुल भी नहीं करते हैं, क्योंकि इनका रिवाज है कि मरकर उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिली। इसलिए ये लोग चाहे कितने भी दुखी क्यों न हों, किसी की मौत पर ही जश्न मनाते हैं। इस सुख में ये लोग धन का दान भी करते हैं। उनकी कामना है कि जाने वाले को ईश्वर अच्छा जन्म दे।