फतेहाबाद: किसान आंदोलन का विकलांगों ने किया समर्थन, भूख हड़ताल में हुए शामिल

सरकारें किस प्रकार कारपोरेट्स के हाथों में खेलती है, कैसे इन धन्नासेठों को अधिक से अधिक मुनाफों के लिये आम जनता के संसाधनों को लुटाया जाता है, इस आंदोलन ने यह एकदम शीशे की तरह साफ कर दिया है।

फतेहाबाद।। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ डीसी ऑफिस के बाहर पक्का मोर्चा स्थल पर चल रहे अनशन का विकलांगों ने भी समर्थन किया है। विकलांग अधिकार मंच हरियाणा के जिला प्रधान सुरेन्द्र जांडली व सचिन सुरेन्द्र रतिया अन्य सदस्यों के साथ शनिवार को अनशन स्थल पर पहुंचे और किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से इन तीनों कानूनों को तुरंत वापस लेने की मांग की।

विकलांग अधिकार मंच से परमजीत, अमरिक सिंह, हरजिंदर, भूना किसान सभा से मुंशीराम, अनूप, बख्शी, ओमनाथ, एबलदेवा, इतवारी, मनोज, मंगत, प्यारेलाल सहित अनेक किसान शनिवार को हड़ताल पर बैठे। पड़ाव को संबोधित करते हुए विकलांग अधिकार मंच के जिला प्रधान सुरेंद्र जांडली, जिला सचिव सुरेंद्र रतिया व किसान सभा के जिला प्रधान रामस्वरूप ढाणी गोपाल ने कहा कि खून को भी जमा देने वाली कड़कडाती ठंड के बावजूद किसान दिल्ली की सड़कों पर मजबूती के साथ डटा हुआ है। शहादतें दे रहा है।

इन परिस्थितियों में भी यह आंदोलन शांतिप्रियता और अनुशासन की अनूठी मिशाल पेश कर रहा है। इस आंदोलन की एक खास बात यह है कि इसने सत्ता के चरित्र को जनता के सामने उजागर करके रख दिया है।

सरकारें किस प्रकार कारपोरेट्स के हाथों में खेलती है, कैसे इन धन्नासेठों को अधिक से अधिक मुनाफों के लिये आम जनता के संसाधनों को लुटाया जाता है, इस आंदोलन ने यह एकदम शीशे की तरह साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का टारगेट केवल सरकार नहीं, ये मुनाफाखोर भी हैं।

सरकारें पहले भी देश की सम्पदा स्कूल, रोडवेज, रेलवे, बिजली, खानें आदि इन मुनाफाखोरों पर लुटाती रही हैं, लेकिन शायद ही किसी ने सोचा होगा कि हमारे खेतों और किसानों का भविष्य भी इनके सुपुर्द कर दिया जायेगा। एक बात आज बिलकुल साफ हो गई है कि ये तीनों कानून किसानों के लिये नहींए बल्कि कार्पोरेट के लिये ही बनाये गये हैं।

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