UP- बीमारी और मुफलिसी से गुजर रहा 6 बच्चों का बाप, नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

भूमिहीन होने के साथ गुजर बसर करने के लिए सर पर छत नहीं हैं। बीवी गमले बेचकर बच्चों का पालन पोषण कर रही है।

कासगंज॥ समय और हालात बदलते देर नहीं लगती है। लंबी बीमारी स्वजनों को दाने-दाने के लिए मुहताज कर देती है। इसका प्रमाण बीमारी में मुफलिसी से गुजर रहा 6 बच्चों को पिता बबलू है। जो चारपाई में पूरी तरह मिल चुका है। भूमिहीन होने के साथ गुजर बसर करने के लिए सर पर छत नहीं हैं। बीवी गमले बेचकर बच्चों का पालन पोषण कर रही है।

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धार्मिक नगरी सोरों के मुहल्ला बदरिया का मूल निवासी बबलू के हालात छह साल पहले ठीक ठाक थी। वह केरल प्रांत में रहकर टाइल्स के मैकेनिक के रूप में अच्छी कमाई कर लेता था। जिससे उसकी पत्नी दो बेटियों एवं चार बेटों का पालन पोषण कर लेती थी, लेकिन हालत ने करवट बदले और बबलू के पेट में इंफेक्शन हो गया।

बीमारी ने सारी कमाई खर्च करा दी। जमीन जायदाद जो कुछ भी थी वह बिक गई। पिछले पांच वर्षो से वह काफी परेशान है। अपनी पत्नी एवं छह बच्चों का परिवार लेकर अब घर लौट आया। प्रहलादपुर गांव में खाली दुकानों में ग्रामीणों ने उसे सहारा दिया है। यहां रहकर उसकी पत्नी अपनी बड़ी बेटियों के साथ मिलकर गमले एवं गाय भैंस को चारा खिलाने वाली नाद बनाती हैं। इनकी बिक्री के बाद जो भी पैसे आते हैं, उनसे परिवार का गुजारा हो रहा है।

उधार लेकर शुरू किया है धंधा

बबलू की पत्नी कमलेश का कहना है कि प्रहलादपुर के ग्रामीणों ने उनके स्वजनों को सहारा दिया है। गमले एवं नाद बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के लिए उधार के रूप में ग्रामीणों से नकदी ली है। इसके बाद ही काम धंधा शुरू किया है। जो बचत होती है। उसमें से परिवार का खर्च चलता है, और उधारी भी चुकाई जा रही है।

जिला प्रशासन से लगाई थी मदद की गुहार

चार वर्ष पूर्व जब बबलू बीमारी के चलते सब कुछ गवांकर वापस जिले में आया तो उसने अपनी बीमारी का वास्ता देकर जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उसके प्रार्थना पत्र पर किसी ने गौर नहीं किया। हालत दिन प्रतिदिन खराब होते चले गए। आज बबलू पूरी तरह चारपाई में मिल गया है। कोई गतिविधि नहीं है। बस सांसे ही उसकी जिंदगी बनी हुई है।

नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

कमलेश का कहना है कि उसे अब तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। उसके पास ना तो राशन कार्ड है। और ना ही आयुष्मान कार्ड, इसके अलावा प्रधानमंत्री की आवासीय योजना के अंतर्गत भी उसे किसी तरह का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हाल ही में प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने लॉकडाउन में मेहनत मजदूरी करने वालों के लिए लागू की एक हजार की योजना का भी उसे लाभ नहीं मिला है।

सहायता की दरकार समाजसेवियों से गुहार

भूमिहीन एवं आवासहीन बबलू सड़क के किनारे ग्रामीणों की पनाह में परिवार सहित गुजर बसर कर रहा है। यदि सुबह की रोटी उसके स्वजनों को नसीब हो जाए तो शाम का पता नहीं। ऐसे हालात हैं। जिले में तमाम समाजसेवी है जो लोगों की मदद करते हैं। बबलू के परिवार को ऐसे समाज सेवियों की मदद की दरकार है।

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