बच्ची ने लिखी पीएम मोदी को चिट्ठी, कहा- वायु प्रदूषण का बच्चों पर हो रहा बुरा असर, तत्काल कदम उठाएं

देश के सभी बच्चों की तरफ से खत लिखकर प्रधानमंत्री से बढ़ते वायु प्रदूषण के खिलाफ तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

नई दिल्ली॥ बच्चों के प्रदूषित हवा में सांस लेने से उनके स्वास्थ्य पर हो रहे गंभीर प्रभाव से चिंतित 12 साल की जलवायु कार्यकर्ता रिद्धिमा पांडे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक खुला खत लिखा है। रिद्धिमा ने देश के सभी बच्चों की तरफ से यह खत लिखकर प्रधानमंत्री से बढ़ते वायु प्रदूषण के खिलाफ तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

नीले आसमान के लिए प्रथम अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस (7 सितम्बर) के मौके पर रिद्धिमा ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी की कॉपी अपने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और ट्विटर पर शेयर की है। उन्होंने लिखा है कि हर साल दिल्ली और चेन्नई जैसे घने शहरों में प्रदूषण के कारण अक्टूबर के बाद सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

वायु प्रदूषण के खतरे से जूझ रहे इन शहरों में रहने वाले लोगों की दुर्दशा को उजागर करते हुए रिद्धिमा ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे सभी नियमों और कानूनों को सख्ती से लागू करने का आदेश दें। इससे हर भारतीय खासकर बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहे खतरे से उनकी रक्षा हो सकेगी।

एक किस्सा साझा करते हुए रिद्धिमा ने कहा कि एक बार स्कूल में उनके शिक्षक ने सभी छात्रों से उनके बुरे सपने के बारे में पूछा। रिद्धिमा ने लिखा, ”अपने बुरे सपने के बारे में बताते हुए मैंने शिक्षक से कहा कि मैं स्कूल एक ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ आ रही हूं क्योंकि हवा बहुत प्रदूषित हो चुकी है। यह बुरा सपना अभी भी मेरी सबसे बड़ी चिंता है क्योंकि प्रदूषित हवा आज हमारे देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। मुझे चिंता है कि अगर मेरे जैसे 12 साल के बच्चे को सांस लेने में मुश्किल होती है, तो अत्यधिक प्रदूषण वाले दिल्ली एवं अन्य शहरों में रहने वाले छोटे बच्चों और मेरे से कम उम्र के बच्चों की क्या हालत होती होगी।”

दिल्ली के एक उदाहरण का हवाला देते हुए रिद्धिमा ने कहा कि यहां की हवा इतनी प्रदूषित हो जाती है कि लोगों को सांस लेने तक में दिक्कत होती है और पिछले साल बाल दिवस के दौरान उसने खुद यह अनुभव किया था, जब वह दिल्ली में थीं। हरिद्वार की युवा जलवायु कार्यकर्ता रिद्धिमा ग्रेटा थनबर्ग के साथ उन 16 बच्चों में शामिल रही हैं जिन्होंने जलवायु परिवर्तन पर सरकारी कार्रवाई की कमी के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट एक्शन समिट में शिकायत दर्ज कराई थी। वह कहती हैं कि अगर बढ़ते वायु प्रदूषण से नहीं निपटा जाता है तो लोगों को स्वच्छ हवा में सांस लेने और जीवित रहने के लिए अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलना होगा।

चिट्ठी के माध्यम से रिद्धिमा ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि ”कृपया हमें यह सुनिश्चित करने में मदद करें कि ऑक्सीजन सिलेंडर बच्चों के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा न बने, जिसे हमें भविष्य में हर जगह अपने कंधों पर ले जाना पड़े।”

 

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