img

Up kiran,Digital Desk : अगर आप या आपके परिवार का कोई बच्चा ब्रिटेन में उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए जाने की योजना बना रहा है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। विदेश जाने की तैयारी के दौरान सबसे बड़ा डर "सही जानकारी" न मिलने और "गलत एजेंट" के जाल में फंसने का होता है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए शुक्रवार को लंदन में एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) हुई है।

किसने मिलाया हाथ और क्यों?

लंदन में 'नेशनल इंडियन स्टूडेंट्स एंड अलम्नी यूनियन' (NISAU) यूके और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा जगत की दिग्गज संस्था 'ICEF' ने हाथ मिलाया है। आसान भाषा में समझें तो, एक संगठन भारतीय छात्रों की आवाज़ है और दूसरा शिक्षा के मानकों को तय करता है। दोनों के साथ आने का एक ही मकसद है—छात्रों की सुरक्षा।

यह गठजोड़ सुनिश्चित करेगा कि जब आप यूनिवर्सिटी में एप्लीकेशन फॉर्म भरें, तब से लेकर जब तक आपका कोर्स पूरा न हो जाए, आपको सही और भरोसेमंद सलाह मिलती रहे।

झोलाछाप एजेंटों की अब खैर नहीं

आजकल एजुकेशन नियमों और वीजा पॉलिसी में आए दिन बदलाव होते रहते हैं। इसका फायदा उठाकर कई अवैध एजेंट छात्रों को डराते हैं या गलत रास्ते बताते हैं। यह नई पार्टनरशिप इसी "गलत जानकारी" (Misinformation) को रोकने का काम करेगी। NISAU की चेयरपर्सन, सनम अरोड़ा ने साफ़ किया है कि अब छात्रों को 'सेंटर' में रखा जाएगा। यानी पूरी भर्ती प्रक्रिया नैतिक (Ethical) होगी। जो जानकारी वेबसाइट पर होगी, वही एजेंट को बतानी पड़ेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों का शोषण बंद होगा।

ईमानदार एजेंटों को मिलेगा इनाम

इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए एक बहुत ही दिलचस्प कदम उठाया गया है। अब अच्छे काम को सराहा जाएगा। NISAU यूके ने दुनिया का पहला 'एजेंट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' शुरू करने की घोषणा की है।

यह सम्मान फरवरी 2026 से लंदन में दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जो एजेंट ईमानदारी से, बिना झूठ बोले और पारदर्शिता के साथ छात्रों की मदद करेंगे, उन्हें 'अचीवर्स गाला' में सम्मानित किया जाएगा। इससे अच्छे सलाहकारों को बढ़ावा मिलेगा और गलत काम करने वालों पर अपने आप दबाव बनेगा।

छात्रों को क्या फायदा?

आईसीईएफ (ICEF) के सीईओ मार्कस बैडे का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को स्पष्टता चाहिए। इस साझेदारी से भारत और ब्रिटेन के बीच शिक्षा के रिश्ते मजबूत होंगे। अब छात्रों को न तो छिपे हुए नियमों से डरना होगा और न ही भारी-भरकम फीस वसूलने वाले एजेंटों से। यह कदम सही मायनों में भारतीय छात्रों की "विदेश शिक्षा यात्रा" को सुहाना और सुरक्षित बनाएगा।