मुस्लिमों के लिए खुशखबरी, रोजे के दौरान नहीं टूटेगा शुगर के मरीजों का रोजा, बस करें ये काम

शुगर से पीड़ित होने पर रोजा रख सकते हैं या नहीं। अगर रख सकते हैं तो रोजे के दौरान क्या करना चाहिए? दवा किस प्रकार से लेनी चाहिए।

अजब-गजब॥ 14 अप्रैल से पहला रोजा रखा जाएगा। ऐसे में मुस्लिमों के लिये एक बड़ी खुशखबरी आई है। दरअसल रोजे आरम्भ होने से पहले ही शुगर के मरीजों के सवालों की लिस्ट लम्बी होती चली जाती है। शुगर से पीड़ित होने पर रोजा रख सकते हैं या नहीं। अगर रख सकते हैं तो रोजे के दौरान क्या करना चाहिए? दवा किस प्रकार से लेनी चाहिए।

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इसी को ध्यान में रखते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज (JN Medical College) में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जेएन मेडिकल कॉलेज के राजीव गांधी सेंटर फॉर डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलोजी और मेडिसिन विभाग के वक्ताओं सहित अन्य कॉलेजों से आये वक्ताओं ने रोजे तथा शुगर के मरीजों से जुड़ी अहम मशवरे पर कई प्रकार की खास सूचना दी।

मेडिकल कॉलेज के पूर्व निदेशक (former director) प्रोफेसर जमाल अहमद ने अपने संबोधन में कहा कि शुगर का शिकार लोगों को रोजे के कम से कम एक महीने पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि उन्हें रोजे के दौरान अपनी दवा बदलनी या कम करनी पड़ सकती है।

प्रोफेसर ने कहा कि शुगर के मरीजों को इफ्तार और सहरी के दौरान संयम से खाना पीना चाहिए। उन्हें शर्करा वाले पेय, तले हुए खाद्य पदार्थ और उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। इसके अलावा रोजे के दौरान रक्त शर्करा की जांच की जानी चाहिए, इससे रोजा नहीं टूटता है।

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