Up kiran,Digital Desk : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ (Global Tariffs) को अवैध घोषित किए जाने के बाद भारत में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भारत-अमेरिका के बीच हुए हालिया अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने दबाव और जल्दबाजी में एक ऐसी डील की है, जो भारतीय किसानों और देश की आर्थिक संप्रभुता के लिए 'परेशानी' (Ordeal) साबित होगी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार से मांग की है कि इस समझौते को तुरंत 'होल्ड' पर रखा जाए और शर्तों पर नए सिरे से बातचीत की जाए।
कांग्रेस के 3 मुख्य आरोप: क्यों है यह डील 'एकतरफा'?
1. जल्दबाजी और खराब टाइमिंग:
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि जब अमेरिकी न्याय व्यवस्था में टैरिफ को लेकर सुनवाई चल रही थी, तो भारत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया? कांग्रेस का तर्क है कि यदि सरकार थोड़ा ठहरती, तो ट्रंप के टैरिफ रद्द होने के बाद भारत बेहतर स्थिति (Bargaining Position) में होता। पार्टी ने आरोप लगाया कि 2 फरवरी 2026 की रात अचानक की गई यह घोषणा किसी राजनीतिक दबाव का परिणाम थी।
2. किसानों के हितों के साथ समझौता:
कांग्रेस का दावा है कि इस डील के तहत अमेरिका से होने वाले आयात के नियमों में ढील (Import Liberalization) दी गई है, जिससे भारतीय किसानों को भारी नुकसान होगा। जयराम रमेश ने कहा कि जब तक अमेरिका से स्पष्ट सफाई नहीं मिल जाती, तब तक आयात उदारीकरण को लागू नहीं किया जाना चाहिए।
3. 18% टैरिफ का बोझ अब भी बरकरार:
भले ही अमेरिका ने भारत पर दंडात्मक टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने की बात कही है, लेकिन कांग्रेस इसे नाकाफी मानती है। पार्टी का कहना है कि यह 'रेसिप्रोकल टैरिफ' (पारस्परिक शुल्क) भारत के निर्यातकों के लिए अब भी एक बड़ी बाधा है, जबकि अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे खोले जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद और उलझा मामला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर लगाए गए वैश्विक टैरिफ 'असंवैधानिक' थे। इस फैसले ने ट्रंप की उस टैरिफ नीति की बुनियाद हिला दी है, जिसके डर से कई देशों ने व्यापार समझौते किए थे। कांग्रेस इसी को आधार बनाकर कह रही है कि भारत एक 'अवैध' डर के साये में समझौते की मेज पर गया।
ट्रंप का रुख: "कुछ नहीं बदलेगा"
दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अदालती फैसले के बावजूद भारत के साथ हुई डील जारी रहेगी। ट्रंप ने अपने हालिया बयान में दोहराया कि भारत टैरिफ देगा और अमेरिका अपने हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने उनके अनुरोध पर रूस से तेल खरीद में कमी की है, जिसे कांग्रेस ने भारत की विदेश नीति पर दबाव करार दिया है।
क्या है आगे की राह?
कांग्रेस की मांग है कि इस समझौते की पूरी पारदर्शिता के साथ संसद में समीक्षा की जाए। वहीं, सरकार का पक्ष है कि यह समझौता वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय निर्यातकों को सुरक्षा प्रदान करता है। फिलहाल, यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले सकता है।




