5G की लॉन्चिंग के खिलाफ याचिका पर जूही चावला को लगा तगड़ा झटका, जानें कोर्ट ने क्यों लगाया 20 लाख रुपए का जुर्माना

हाईकोर्ट ने खारिज की 5जी की लॉन्चिंग के खिलाफ जूही चावला की याचिका

नई दिल्ली॥ दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म एक्ट्रेस जूही चावला की 5G को लॉन्च करने से रोकने की मांग संबंधी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी है। जस्टिस जेआर मिधा की बेंच ने जूही चावला पर 20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। पिछले 2 जून को जूही चावला की ओर से वकील दीपक खोसला की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

Juhi Chwla 5G

अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता ने उचित कोर्ट फीस जमा नहीं किया है। कोर्ट ने एक हफ्ते के भीतर कोर्ट फीस जमा करने के निर्देश दिये हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिका दायर करने से पहले सरकार को नोटिस देना चाहिए था। अदालत ने यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका के पक्ष में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।

जूही चावला की याचिका पर सुनवाई के दौरान कुछ लोगों की ओर से गाना गाने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह पांच जुलाई तक उन लोगों के विरूद्ध कार्रवाई करें, जिन्होंने सुनवाई के दौरान गाना गाकर कोर्ट की सुनवाई में बाधा पहुंचाया और उसकी गरिमा को कम करने की कोशिश की।

पेशी के दौरान कोर्ट ने जूही चावला से पूछा था कि क्या 5G को लेकर अपनी शिकायत के साथ सरकार के पास गई थीं? तब जूही की ओर से कहा गया कि नहींl इस पर कोर्ट ने पूछा था कि क्या सरकार के पास बिना प्रतिवेदन दिए कोर्ट आ सकते हैं?

पेशी के दौरान केंद्र सरकार की ओर से वकील अमित महाजन ने कहा था कि याचिका में सुनवाई की जल्दबाजी की वजह नहीं बताई गई है। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यह याचिका अर्थहीन है। इसमें क्षेत्राधिकार का मसला है। तब कोर्ट ने कहा था कि हम मेरिट पर नहीं जा रहे हैं। याचिका सुनवाई योग्य है कि नहीं! इस पर विचार कर रहे हैं। तब मेहता ने कहा था कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

अमित महाजन ने कहा था कि मुझे बताया गया है कि याचिकाकर्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर टावरों के दुष्प्रभाव का जिक्र किया था। वह याचिका अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लंबित होने की वजह से उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में केस दायर करने के लिए नया रास्ता निकाला है। मेहता ने कहा था कि 5G पर कोई कानूनी रोक नहीं है।

इसे शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। तब कोर्ट ने कहा था कि इसमें एक शर्त है कि लोगों को प्रभावित कर सकती है। तब मेहता ने कहा था कि अगर केंद्र ने गलत तरीके से अनुमति दी है तो उसका समाधान है।

सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि 5G की लॉन्चिंग सरकार का नीतिगत मसला है। सरकार की नीति तभी निरस्त की जा सकती है, अगर वह संविधान के अनुच्छेद 14 या दूसरे प्रावधानों का उल्लंघन कर रही हो। इसके लिए रिट पिटीशन दाखिल की जा सकती है।

याचिका में कहा गया था कि 5G उपकरणों के रेडिएशन से लोगों के स्वास्थ्य के खराब होने की आशंका है। जूही चावला ने इस पर एक अध्ययन के हवाले से कहा था कि यह तकनीक काफी नुकसानदायक है। याचिका में कहा गया था कि ऐसा कोई अध्ययन नहीं किया गया है जो यह बता सके कि 5G तकनीक मनुष्य के लिए सुरक्षित है। ऐसे में इस तकनीक को लॉन्च करने से रोका जाए।

 

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