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निर्जला एकादशी व्रत का महत्व

भारतीय ऋषि और मनीषी मात्र तपस्वी एवं त्यागी ही नहीं थे, उनके कुछ प्रयोगों, व्रतों, उपवासों, अनुष्ठानों के विधि-विधान एवं निर्देशों से तो प्रतीत होता है कि वे बहुत ऊँचे दर्जे के मनस्विद, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विचारक भी थे। अब ज्येष्ठ मास में जब गर्मी अपने चरम पर हो, ऐसे में निर्जला एकादशी का नियम-निर्देश केवल संयोग नहीं हो सकता। यह जल को बचाने का एक शुभ संकल्प ही है।

जेष्ठ माह  गर्मी का महीना है। इस माह में वाष्पीकरण की क्रिया तेजी से होती है। नदियां और तालाब सूखने लगते हैं। पानी सभी के अतिआवश्यक है। गर्मी के शुरू होते ही देश के हिस्सों में जल का संकट खड़ा हो जाता है। जल को बचाने के लिए सभी का प्रयास करना चाहिए, क्योकि जल है तो कल है अर्थात जल ही जीवन है। लोगों को जल का महत्व बताने के लिए ही निर्जला एकादशी व्रत का विधान किया गया है।

निर्जला एकादशी व्रत की कथा

यदि हम ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में एक दिन सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन सूर्योदय तक बिना पानी के उपवास करें तो बिना बताए ही हमें जल की आवश्यकता, अपरिहार्यता और विशेषता स्वतः पता लग जाएगी। जीवन बिना भोजन, वस्त्र के कई दिन संभाला जा सकता है, परंतु जल और वायु के बगैर नहीं। शायद उन दूरदर्शी महापुरुषों को काल के साथ ही शुद्ध पेयजल के भीषण अभाव और त्रासदी का भी अनुमान रहा होगा।  इसीलिए केवल प्रवचनों, वक्तव्यों से जल की महत्ता बताने के बजाए उन्होंने उसे व्रत श्रेष्ठ एकादशी जैसे सर्वकालिक सर्वजन हिताय व्रतोपवास से जोड़ दिया।

 निर्जला एकादशी व्रत का नियम

निर्जला एकादशी का व्रत महान पुण्यदायी है। ये व्रत भगवान के प्रति भक्त की अटूट आस्था और विश्वास को प्रकट करता है। इस दिन शक्कर युक्त जल का घड़ा भर कर आम, खरबूजा, पंखा, छतरी इत्यादि वस्तुओं के दान से असीम पुण्य प्राप्त होता है। कहते है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को मृत्यु के समय मानसिक और शारीरिक कष्ट नहीं होता।

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इस एकादशी में पानी पीना निषेध है। इसके पीछे भी एक कारण है। वर्षभर में मात्र एक दिन पानी के बगैर रहने से व्रती को शारीरिक रूप से काफी फायदा होता है। गर्मी के दिनों में प्यास लगने की वजह से बारंबार पानी पीने का मन होता है। इसलिए भोजन को पचाने वाले रस के मंद पड़ जाने से पाचनशक्ति भी मंद पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में यदि एक पूरा दिन हम अगर पानी के बगैर व्यत्तीत करें तो इससे शरीर के सभी तंत्रों को थोड़ा विराम मिल जाता है।

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