Imprisonment : दहेज हत्या में कितने लोगों को हुई कितने साल की सजा !

द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीम अहमद की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में सिपाही, उसके भाई और बहन को दोषी ठहराया है।

हल्द्वानी : द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीम अहमद की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में सिपाही, उसके भाई और बहन को दोषी ठहराया है। अदालत ने तीनों को दस-दस साल की सजा और 32-32 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गिरजा शंकर पांडे के अनुसार मालधनचौड़ रामनगर निवासी विमला का प्रेम विवाह सिपाही पूरन चंद्र से हुआ था।

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26 दिसंबर 2007 को विमला की मौत हो गई। आरोप था कि उसे जलाकर मारा गया और बिना पोस्टमार्टम कराए ससुराल के लोगों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। विमला के भाई पूरन चंद्र ने 27 दिसंबर 2007 को पति पूरन चंद्र सहित उसके परिवार के छह लोगों के खिलाफ 304 बी, 201, 498 ए, 34, 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पति पूरन चंद्र, उसके भाई सुरेश चंद्र और बहन इंदिरा को दहेज हत्या का दोषी ठहराया। अदालत ने धारा 304बी/34 के तहत तीनों दोषियों को दस-दस साल के कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।

अर्थदंड नहीं देने पर प्रत्येक को एक एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 201 के तहत तीनों दोषियों को तीन तीन वर्ष का कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। अदालत ने धारा 498 ए के तहत तीनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष का कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत छह-छह माह का कारावास और एक एक हजार रुपये अर्थदंड भुगतना होगा। अदालत ने तीनों आरोपियों को धारा 302/34 और धारा 3 दहेज प्रतिषेध अधिनियम से दोषमुक्त कर दिया है।

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