गोरखपुर के ग्रामीण इलाकों में ग्राम प्रधान और लेखपाल करा रहे सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा, मुख्यमंत्री योगी का भी खौफ नहीं

उत्तर प्रदेश में जहाँ मुख्यमंत्री योगी एक तरफ भू माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस को समय समय पर निर्देशित करते हुए आ रहे हैं, वहीँ उनके ही गृह जनपद गोरखपुर के बडहलगंज क्षेत्र के गाँव कुरावं में ग्राम प्रधान द्वारा और लेखपाल के देखरेख में एक सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कराया जा रहा है.

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश में जहाँ मुख्यमंत्री योगी एक तरफ भू माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस को समय समय पर निर्देशित करते हुए आ रहे हैं, वहीँ उनके ही गृह जनपद गोरखपुर के बडहलगंज क्षेत्र के गाँव कुरावं में ग्राम प्रधान द्वारा और लेखपाल के देखरेख में एक सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कराया जा रहा है. जिसके चलते पूरे गाँव में जल जमाव की समस्या उत्पन्न हो गई है.

                                                                                                        (सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कर बनाया गया मकान) 

क्या है मामला

दरअसल, बडहलगंज का कुराँव गाँव पिछले कई सालों से जल जमाव की समस्या से जूझ रहा है, जिसकी शिकायत मौखिक तौर से कई मौके पर ग्राम प्रधान से की गई, लेकिन ग्राम प्रधान इस समस्या का हल निकालने की जगह, इस समस्या के मुख्य कारणों को ही बढ़ावा देने में जुटे हुए हैं.

बता दें कि ग्रामीणों का मानना है कि इस जल जमाव की समस्या का सबसे बड़ा कारण सरकारी ज़मीन पर स्थित एक गड्ढा पर कब्ज़ा करना है, जिसके बाद से ही ये समस्या उत्पन्न हुई है. गौरतलब है कि वहीँ इस मामले में जब लेखपाल से मोबाइल पर जानकारी मांगी गई, तो उनका कहना था ये अतिक्रमण उनके जानकारी में है, लेकिन वो इस पर कोई कदम नहीं उठा सकते हैं.

इसके साथ ही ग्राम प्रधान ने मोबाइल बातचीत पर इस कब्ज़े की जानकारी होने से इनकार करते रहे, लेकिन जब लेखपाल से इसकी पुष्टि की गई, तो मामला इसके उल्ट था और लेखपाल ने इस बात की पुष्टि भी की इन सभी अतिक्रमण की जानकारी ग्रामप्रधान को पहले से ही है.

वहीँ इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि इस गड्ढ़े पर गाँव के ही कुछ लोग प्रधान और लेखपाल संग मिलकर, मिट्टी और अन्य तरीकों से इसकी पटाई कर रहे है, जिसकी वजह से बारिश के पानी की निकासी बाधित हो गई और जल जमाव की भयंकर स्थिति पैदा हो गई.

करोड़ों की सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की हो रही कोशिश

लेखपाल से मिली जानकारी के अनुसार ये सरकारी ज़मीन करीब-करीब 30 डिसमिल की है, जिसमें से फिलहाल 4 से 5 डिसमिल ज़मीन पर अतिक्रमण हो चुका है, वहीँ ये अतिक्रमण अभी भी जारी है, जिसके वजह से करोड़ों रूपए की सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने में देरी नही लगेगी.

अधिकारी भी कर रहे अनदेखा

इस बाबत लेखपाल से हुई बातचीत के अनुसार इस कब्ज़े की जानकारी अधिकारियों भी है. लेकिन इसके बावजूद भी कोई सख्त कदम नहीं उठाना, एक बड़े भ्रष्टाचार के तरफ कर रहा है और इस अनदेखी के चलते सरकार के साथ ही साथ ग्रामीणों का भी नुकसान झेलना पड़ रहा है.

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