'मेड इन इंडिया' दवा के लिए अमेरिका में चुकाए ₹65,000: सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट ने खोली यूएस हेल्थकेयर सिस्टम की पोल
भारत में मिलने वाली सस्ती दवा के लिए अमेरिका में चुकाई भारी-भरकम कीमत
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय मूल के यूजर की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसने अमेरिका के महंगे चिकित्सा खर्चों की कड़वी हकीकत को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है। यूजर ने बिल की फोटो शेयर करते हुए बताया कि अमेरिका के एक अस्पताल में उसे एक जीवन रक्षक दवा की जरूरत पड़ी, जिसके बॉक्स पर साफ-सामने 'मेड इन इंडिया' (Made in India) लिखा हुआ था। लेकिन जब उसके हाथ में अस्पताल का बिल आया, तो वह दंग रह गया। भारत में बेहद मामूली दाम पर मिलने वाली उस दवा के लिए अमेरिकी अस्पताल ने करीब 65 हजार रुपये ($780 से अधिक) का बिल थमा दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट, अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम पर उठे सवाल
यह पोस्ट एक्स (X) और रेडिट (Reddit) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गई है। लाखों लोग इस पोस्ट को देख चुके हैं और इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वायरल पोस्ट में शख्स ने दर्द बयां करते हुए लिखा कि जो दवा भारत के किसी भी मेडिकल स्टोर पर महज कुछ सौ या हजार रुपये में आसानी से मिल जाती है, उसी दवा के लिए अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली (US Healthcare System) में आम लोगों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। नेटिजन्स इस पोस्ट को शेयर कर अमेरिकी बीमा कंपनियों और अस्पतालों के गठजोड़ पर जमकर गुस्सा निकाल रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर भारतीय जेनेरिक दवाओं की बढ़ती मांग और कीमतों का खेल
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दवाओं की मूल्य निर्धारण (Pricing) नीति और जेनेरिक दवाओं के महत्व को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। भारत को दुनिया का 'फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' कहा जाता है, जो पूरी दुनिया को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं सप्लाई करता है। लेकिन अमेरिका जैसे विकसित देशों में पेटेंट कानूनों, जटिल इंश्योरेंस नियमों और अस्पतालों के भारी-भरकम कमीशन के कारण यही 'मेड इन इंडिया' दवाएं आम नागरिकों तक पहुंचते-पहुंचते कई गुना महंगी हो जाती हैं, जिसका खामियाजा वहां रहने वाले अप्रवासियों और मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ता है।