भरत तिवारी एनकाउंटर: 'सीएम सम्राट चौधरी ने की सबसे त्वरित कार्रवाई', विपक्ष के आरोपों पर बिहार BJP चीफ संजय सरावगी का पलटवार

भरत तिवारी एनकाउंटर: 'सीएम सम्राट चौधरी ने की सबसे त्वरित कार्रवाई', विपक्ष के आरोपों पर बिहार BJP चीफ संजय सरावगी का पलटवार

भोजपुर के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में हो रही चौतरफा बयानबाजी और सियासी घमासान के बीच सत्ताधारी दल भाजपा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होने पर उठ रहे सवालों और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद अब बिहार बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी खुद सरकार के बचाव में आगे आए हैं। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा उठाए गए कदमों को ऐतिहासिक और सबसे तेज बताया है।

'बिहार के इतिहास में पहली बार इतनी तेज कार्रवाई'

मंगलवार (30 जून, 2026) को मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए बिहार बीजेपी चीफ संजय सरावगी ने कहा, "इस दुखद मामले को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना के महज तीन दिनों के भीतर न्यायिक जांच की घोषणा कर दी। मुझे लगता है कि बिहार के इतिहास में यह अपने आप में पहला ऐसा मामला है जहां इतनी तेजी से फैसला लिया गया।"

संजय सरावगी ने आगे कहा कि न सिर्फ न्यायिक आयोग के गठन का फैसला लिया गया, बल्कि कैबिनेट की मुहर लगते ही अगले 24 घंटे के भीतर हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त जज खुद घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां पीड़ित परिवार से मिलकर उनका पक्ष जाना। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, इससे ज्यादा त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई किसी भी सरकार में मुमकिन नहीं है।

भाई चंदन का आरोप: पुलिस को बचाने के लिए हो रही लीपापोती

एक तरफ जहां सरकार अपनी त्वरित कार्रवाई की पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी तरफ भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने सरकार और प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चंदन ने सीधे तौर पर जांच में लीपापोती का आरोप लगाते हुए कहा, "एफआईआर दर्ज हुए एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अगर इस मामले में कोई आम जनता आरोपी होती, तो पुलिस उसे कब का घसीटकर जेल में डाल चुकी होती। लेकिन यहाँ का कानून पुलिसवालों को बचा रहा है।"

चंदन तिवारी ने प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए यह भी पूछा कि आम जनता की मांग पर जब भरत तिवारी की मूर्ति स्थापित की जा रही थी, तो प्रशासन ने उस पर रोक क्यों लगाई? हालांकि, उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें अदालत से ही न्याय की उम्मीद है।

मां का दावा: '1400 करोड़ के घोटाले को छिपाने के लिए हुआ मर्डर'

इस बीच, बेटे को खो चुकी भरत तिवारी की मां का दर्द और आक्रोश भी फूट पड़ा है। उन्होंने इस घटना को एनकाउंटर मानने से साफ इनकार करते हुए इसे सोची-समझी हत्या करार दिया। भरत तिवारी की मां ने आरोप लगाया, "यह कोई एनकाउंटर नहीं, बल्कि सीधे-सीधे मर्डर है। प्रशासन ने जानबूझकर मेरे बेटे को रास्ते से हटाया है। इलाके के एसडीएम ने 1400 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला किया था, जिसका भरत विरोध कर रहा था। इसी समाजसेवा की उसे सजा मिली है। इस साजिश में शामिल हर एक दोषी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।"

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