धमाल 4 रिव्यू: सिनेमाघरों में आ गई रितेश-अरशद की तिकड़ी, जानें क्या इस बार भी मिलेगा हंसी का डबल डोज!
मनोरंजन की दुनिया में जब भी कल्ट कॉमेडी फिल्मों का जिक्र होता है, तो 'धमाल' फ्रेंचाइजी का नाम हर किसी की जुबान पर आ जाता है। रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और आशीष चौधरी की वो चौकड़ी आज भी लोगों को लोटपोट करने के लिए काफी है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मेकर्स अब इस फ्रेंचाइजी का चौथा पार्ट यानी 'धमाल 4' लेकर सिनेमाघरों में हाजिर हो चुके हैं। अगर आप इस वीकेंड अपने परिवार के साथ किसी जबरदस्त कॉमेडी फिल्म की तलाश में हैं, तो यह रिव्यू आपके लिए ही है।
क्या है धमाल 4 की कहानी और नया ट्विस्ट
फिल्म की शुरुआत वहीं से होती है जहां से धमाल के किरदार अक्सर अपनी किस्मत चमकाने की कोशिश करते हैं। इस बार भी कहानी में एक बड़ा खजाना, ढेर सारा कन्फ्यूजन और एक लंबी फर्राटेदार रेस है। हालांकि, इस बार मेकर्स ने कहानी के बैकड्रॉप में थोड़ा बदलाव किया है। फिल्म में लोकल लोकेशंस और कुछ ऐसे देसी कनेक्ट्स जोड़े गए हैं जो उत्तर भारत के दर्शकों को बेहद पसंद आने वाले हैं। रितेश देशमुख और अरशद वारसी की कॉमिक टाइमिंग फिल्म की जान है, जो आपको एक पल के लिए भी स्क्रीन से नजरें हटाने नहीं देगी।
क्यों घर पहुंचने के बाद भी याद आएंगे डायलॉग्स
धमाल 4 की सबसे बड़ी यूएसपी इसका स्क्रीनप्ले और चुटीले डायलॉग्स हैं। फिल्म के कुछ सीन्स इतने मजेदार हैं कि थियेटर से बाहर निकलने और घर पहुंचने के बाद भी आपके दिमाग पर उनका खुमार छाया रहेगा। जावेद जाफरी ने हमेशा की तरह अपनी मासूमियत और अजीबोगरीब हरकतों से महफिल लूट ली है। निर्देशक ने फिल्म की रफ्तार को इतना तेज रखा है कि कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती। हालांकि, फिल्म का सेकेंड हाफ थोड़ा सा खिंचा हुआ लगता है, लेकिन क्लाइमेक्स का पागलपन उस कमी को पूरी तरह से ढक देता है।
फाइनल वर्डिक्ट: थियेटर जाएं या ओटीटी का इंतजार करें
अगर आप दिमाग को थोड़ी देर के लिए आराम देकर सिर्फ और सिर्फ ठहाके लगाना चाहते हैं, तो 'धमाल 4' एक परफेक्ट चॉइस है। यह एक कंपलीट फैमिली एंटरटेनर फिल्म है जिसे आप अपने बच्चों और बड़ों के साथ खुलकर एंजॉय कर सकते हैं। फिल्म को हमारी तरफ से 5 में से 3.5 स्टार मिलते हैं। इस वीकेंड अपने नजदीकी सिनेमाघरों में टिकट बुक करें और हंसी के इस सफर का हिस्सा बनें।