कहीं काम का स्ट्रेस समझकर आप भी तो नहीं कर रहे बड़ी भूल, हर वक्त रहने वाली थकान के पीछे छुपा है '
आज की इस भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में दिनभर की मसरूफियत के बाद शाम को बदन टूटना, कमजोरी महसूस होना या काम के दबाव में मानसिक तनाव (Stress) होना बेहद आम बात मान ली गई है। अमूमन जब भी हमें बिना किसी स्पष्ट वजह के सुस्ती सताती है या मूड खराब होता है, तो हम अक्सर खुद ही डॉक्टर बनकर यह धारणा बना लेते हैं कि शायद ऑफिस का प्रेशर ज्यादा है या आजकल रात को नींद ठीक से पूरी नहीं हो पा रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप महज एक सामान्य थकान या वर्क लोड समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, वह असल में आपके शरीर के भीतर पनप रही न्यूट्रिशन की बड़ी खराबी हो सकती है? हेल्थ और लाइफस्टाइल डेस्क की ओर से स्वाति शर्मा की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड विशेष खोजी स्वास्थ्य रिपोर्ट में विस्तार से जानिए कि कैसे आपके शरीर में आयरन की साइलेंट एंट्री आपके स्वास्थ्य को खोखला कर रही है।
हीमोग्लोबिन का गिरता स्तर और सुस्ती का परमानेंट कनेक्शन, जानें शरीर के भीतर कैसे कम होती है ऑक्सीजन
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, मानव शरीर में आयरन की कमी का सबसे पहला और मुख्य प्रभाव हमारी ऊर्जा के स्तर पर पड़ता है। आयरन हमारे रक्त में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए सबसे जरूरी तत्व है, और यही हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के सभी अंगों और कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम करता है। जब शरीर में आयरन का ग्राफ तेजी से गिरता है, तो हीमोग्लोबिन का निर्माण भी प्रभावित होता है, जिससे मांसपेशियों और महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। यही वजह है कि भरपूर नींद लेने और अच्छा खानपान रखने के बावजूद आप हर वक्त एक अजीब सी सुस्ती, कमजोरी और भारीपन महसूस करते हैं, जो सामान्य आराम करने से भी ठीक नहीं होता।
जब दिमाग को नहीं मिलता पूरा ऑक्सीजन: चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और मूड स्विंग्स का बढ़ता खतरा
आयरन की कमी सिर्फ आपकी शारीरिक क्षमता को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक कौशल (Cognitive Skills) पर भी सीधा हमला करती है। हीमोग्लोबिन की कमी के कारण जब हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं को उनकी जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं मिल पाती, तो न्यूरोलॉजिकल संतुलन बिगड़ने लगता है। इसके परिणामस्वरूप काम पर ध्यान केंद्रित करने या फोकस करने में अत्यधिक परेशानी होना, बार-बार बिना वजह तेज सिरदर्द होना, अचानक मूड स्विंग्स होना और बात-बात पर बेवजह चिड़चिड़ापन होने जैसी मानसिक दिक्कतें सामने आने लगती हैं, जिसे लोग अक्सर ऑफिस या पर्सनल लाइफ का डिप्रेशन और एंग्जायटी समझने की भूल कर बैठते हैं।
सीढ़ियां चढ़ते ही फूलने लगती है सांस और बढ़ जाती है धड़कन, कहीं आपका दिल भी तो नहीं कर रहा डबल मेहनत?
अगर आपको थोड़ा सा भी पैदल चलने, घर का सामान्य काम करने या ऑफिस की सीढ़ियां चढ़ने पर अचानक सांस फूलने की समस्या हो रही है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को सामान्य बनाए रखने के लिए हमारे दिल (Heart) को बहुत तेजी से ब्लड पंप करना पड़ता है, जिसके कारण हृदय की धड़कनें अचानक बहुत तेज (Palpitations) हो जाती हैं। इसके अलावा, त्वचा का रंग असामान्य रूप से पीला पड़ना, कड़कड़ाती धूप या सामान्य मौसम में भी हाथ और पैरों का हमेशा ठंडा बने रहना और मिट्टी, चाक या बर्फ जैसी अजीबोगरीब चीजें खाने की तीव्र इच्छा होना (जिसे मेडिकल भाषा में पाइका कहा जाता है), आयरन की कमी के बेहद पुख्ता और क्लासिक लक्षण हैं।
सामान्य मानसिक स्ट्रेस और आयरन की कमी में कैसे करें असली पहचान, इन पैमानों से समझें बारीक अंतर
हालांकि आयरन की कमी और अत्यधिक मानसिक तनाव के लक्षण काफी हद तक एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ बेहद बारीक शारीरिक संकेतों के जरिए आप इनके बीच का अंतर आसानी से पहचान सकते हैं। जहां मानसिक स्ट्रेस केवल काम के दबाव या किसी खास परिस्थिति के दौरान बढ़ता है और वेकेशन लेने या माइंड फ्रेश करने से ठीक हो जाता है, वहीं आयरन की कमी के कारण होने वाली शारीरिक कमजोरी चौबीसों घंटे बनी रहती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर आप लंबे समय से इन लक्षणों से जूझ रहे हैं, तो खुद इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और एक कंपलीट ब्लड काउंट (CBC) और सीरम फेरिटिन टेस्ट करवाएं, ताकि समय रहते सही सप्लीमेंट्स और डाइट के जरिए एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सके।