झारखंड में खत्म हुआ राज्यसभा सीट का हाई-वोल्टेज ड्रामा, हेमंत सोरेन के मास्टरस्ट्रोक से जेएमएम-कांग्रेस विवाद सुलझा
झारखंड के सियासी गलियारों में पिछले कई दिनों से राज्यसभा चुनाव की सीटों को लेकर चल रही खींचतान और सस्पेंस पर आखिरकार सोमवार को विराम लग गया है। सूबे के सत्ताधारी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के दो बड़े घटकों— झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच पैदा हुआ गतिरोध पूरी तरह सुलझ गया है। दोनों ही दल अब आपसी सहमति के बाद राज्य की एक-एक सीट पर अपने उम्मीदवार उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हो गए हैं। इस बड़े राजनीतिक समझौते की आधिकारिक पुष्टि करते हुए जेएमएम के वरिष्ठ नेता मनोज पांडे ने साफ किया कि गठबंधन के भीतर कुछ वैचारिक मतभेद और दुविधाएं जरूर थीं, जिन्हें अब सर्वसम्मति से दूर कर लिया गया है। उन्होंने पुरजोर दावा किया कि झारखंड में इंडिया गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और दोनों ही सीटों पर उनके उम्मीदवारों की शानदार जीत तय है।
कार्यकर्ताओं की भावना बनाम गठबंधन धर्म: हेमंत सोरेन के एक फैसले ने बदल दी पूरी बाजी
राज्यसभा सीटों के इस पेचीदा समझौते के पीछे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की राजनीतिक परिपक्वता को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। मामले की इनसाइड स्टोरी साझा करते हुए जेएमएम नेता मनोज पांडे ने बताया कि पार्टी नेतृत्व के सामने अपने जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करने की एक बहुत बड़ी चुनौती और दुविधा थी। कार्यकर्ता चाहते थे कि पार्टी अपनी ताकत के दम पर आगे बढ़े, लेकिन इन सबके बीच हेमंत सोरेन ने बड़े कैनवास पर देखते हुए गठबंधन धर्म और विपक्षी एकता की भावना को सर्वोपरि रखा। मनोज पांडे ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड में इस समय हेमंत सोरेन की एक बेहद मजबूत और लोकप्रिय सरकार चल रही है। हम उन ताकतों के हर मंसूबे को पूरी तरह नाकाम कर देंगे जिन्हें यह गलतफहमी या घमंड है कि वे सिर्फ धनबल (पैसे) के दम पर राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं या लोकतंत्र को खरीद सकते हैं।
दिल्ली में जुटने वाले हैं विपक्षी दिग्गज; ममता बनर्जी और डीएमके को लेकर जेएमएम ने दी बड़ी सफाई
झारखंड में सीट शेयरिंग का विवाद सुलझाने के बाद अब सबका ध्यान नई दिल्ली में होने वाली इंडिया गठबंधन की महाबैठक पर टिक गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और डीएमके (DMK) जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के गठबंधन से दूरी बनाने की चल रही अफवाहों पर जेएमएम ने खुलकर स्थिति साफ की है। मनोज पांडे ने कहा कि भले ही पश्चिम बंगाल के विधानसभा या स्थानीय चुनावों में टीएमसी ने कांग्रेस से अलग राह चुनी हो, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी खुद इंडिया ब्लॉक को मजबूत करने की सबसे बड़ी पैरोकार हैं और दिल्ली की इस बैठक को सफल बनाने के लिए लगातार पहल कर रही हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर कोई एक साथी किन्हीं कारणों से अलग होता भी है, तो कई नए और प्रभावी दल इस मजबूत मोर्चे में शामिल होने के लिए कतार में खड़े हैं। चुनाव में केंद्रीय बलों के दुरुपयोग और संवैधानिक एजेंसियों की धांधली के खिलाफ यह साझा लड़ाई जारी रहेगी।
यह सिर्फ सीटों का नहीं बल्कि गोडसे बनाम गांधी की विचारधारा का चुनाव है: कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (JPCC) के कद्दावर नेता राकेश सिन्हा ने भी इस पूरे घटनाक्रम और विपक्षी एकजुटता पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने कहा कि झारखंड में राज्यसभा के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी तेजी से चल रही है और मुमकिन है कि खुद मुख्यमंत्री इस दौरान मौजूद रहें। राकेश सिन्हा ने गठबंधन की परिभाषा को नए सिरे से रेखांकित करते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक महज कुछ राजनीतिक दलों का चुनावी जोड़-तोड़ नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र को बचाने और संविधान की रक्षा करने का एक पवित्र आंदोलन है। उन्होंने कहा कि यह देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समावेशी विचारधारा को फिर से स्थापित करने और नाथूराम गोडसे की विभाजनकारी सोच को सिरे से खारिज करने की एक सामूहिक कोशिश है। देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने की इच्छा रखने वाला हर दल इस मुहिम का स्वाभाविक हिस्सा है।
नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सजेगा विपक्ष का मंच, इन 4 बड़े मुद्दों पर केंद्र को घेरने का ब्लूप्रिंट तैयार
सोमवार, 8 जून 2026 को नई दिल्ली के प्रसिद्ध कॉन्स्टिट्यूशन क्लब (संविधान क्लब) में कांग्रेस के नेतृत्व में आयोजित होने वाली इंडिया गठबंधन की इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बैठक में न केवल विपक्षी एकजुटता का शक्ति प्रदर्शन होगा, बल्कि देश के मौजूदा ज्वलंत मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ एक साझा रणनीति तैयार की जाएगी। इस महामंथन के एजेंडे में देश का मौजूदा ऊर्जा आपूर्ति संकट (बिजली और ईंधन की किल्लत), घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के लगातार बढ़ते दाम, सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम से जुड़े हालिया विवाद और नीट (NEET) प्रवेश परीक्षा में सामने आई कथित गड़बड़ियां व पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। इसके साथ ही, विपक्ष साल 2029 में होने वाले आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अभी से एक मजबूत और दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने पर भी विचार-विमर्श करेगा।