MPSC Civil Judge Exam Postponed: महाराष्ट्र सिविल जज और JMFC प्री-एग्जाम टला

MPSC Civil Judge Exam Postponed: महाराष्ट्र सिविल जज और JMFC प्री-एग्जाम टला

महाराष्ट्र न्यायिक सेवा में शामिल होकर जज बनने का ख्वाब देख रहे कानून के ग्रेजुएट्स और उम्मीदवारों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ने आगामी अगस्त महीने में आयोजित होने वाली सिविल जज जूनियर डिवीजन और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) प्रारंभिक परीक्षा को अपरिहार्य कारणों से स्थगित (Postpone) कर दिया है। आयोग द्वारा जारी आधिकारिक शुद्धिपत्र (Corrigendum) के अनुसार, इस भर्ती के तहत आवेदन जमा करने की अंतिम समय सीमा (Application Submission Deadline) को आगे बढ़ाया गया है। इसी के परिणामस्वरूप प्रारंभिक परीक्षा को भी फिलहाल टालने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के हजारों कानून संकाय के अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए कुछ और अतिरिक्त समय मिल गया है।

2 अगस्त को होने वाली थी परीक्षा; अब नई तारीखों का इंतजार

एमपीएससी द्वारा जारी मूल नोटिफिकेशन के तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) और जेएमएफसी के कुल 286 रिक्त पदों को भरने के लिए प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन रविवार, 2 अगस्त 2026 को किया जाना निर्धारित था। इसके लिए राज्य के चार प्रमुख शहरों—छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), कोल्हापुर, नवी मुंबई और नागपुर—में परीक्षा केंद्र बनाए जा रहे थे। लेकिन आवेदन प्रक्रिया में हुए तकनीकी और नीतिगत बदलावों के कारण अब आयोग ने 2 अगस्त की परीक्षा को रद्द कर दिया है। आयोग ने आधिकारिक सर्कुलर में साफ किया है कि सिविल जज प्री-एग्जाम की नई संशोधित तारीख (Revised Exam Schedule) की घोषणा जल्द ही स्वतंत्र रूप से ऑफिशियल वेबसाइट पर अलग से की जाएगी।

परीक्षा टलने के पीछे 'एप्लीकेशन विंडो' का विस्तार बना मुख्य कारण

न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा टलने के कारणों को लेकर काफी सुगबुगाहट थी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कई उम्मीदवारों की पात्रता, नियमों और ऑनलाइन फॉर्म भरने की अंतिम तिथि में किए गए बदलावों के कारण एप्लीकेशन पोर्टल को दोबारा व्यवस्थित करना पड़ा है। चूंकि आवेदन जमा करने की अवधि को आगे बढ़ाया गया है, इसलिए इतने कम समय में 2 अगस्त तक एडमिट कार्ड जारी करना और परीक्षा केंद्रों का प्रबंधन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। हालांकि, आयोग के इस अचानक आए फैसले से उन गंभीर छात्रों को थोड़ी निराशा जरूर हुई है जो पिछले कई महीनों से दिन-रात क्रिमिनल और सिविल लॉ के सिलेबस को मजबूत करने में जुटे थे।

पारदर्शिता और नियमों को लेकर कानूनी दांवपेंच की भी चर्चा

महाराष्ट्र ज्यूडिशियरी परीक्षा के स्थगित होने के पीछे कानूनी हलकों में कुछ अन्य तकनीकी कारणों की भी चर्चा जोरों पर है। दरअसल, हाल के दिनों में तीन साल के वकालत के अनुभव (3-Year Practice Rule) की अनिवार्यता और सोशल रिजर्वेशन (सामाजिक आरक्षण) के मामलों को लेकर माननीय हाईकोर्ट के विभिन्न आदेशों के बाद पात्रता नियमों में कुछ फेरबदल की स्थिति बनी थी। इसके साथ ही, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (EWS) को मिलने वाली वित्तीय रियायतों को लेकर भी अदालती दिशा-निर्देशों के तहत नियमों को स्पष्ट किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के आयोजन में आगे चलकर कोई कानूनी अड़चन न आए, इसलिए आयोग ने सभी विसंगतियों को दूर करने के बाद ही नई तिथि पर परीक्षा कराने का सुरक्षित रास्ता चुना है।

अभ्यर्थी लगातार चेक करते रहें ऑफिशियल वेबसाइट mpsc.gov.in

एमपीएससी ने सभी पंजीकृत उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा न करें। परीक्षा की नई तारीख, एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का डायरेक्ट लिंक और भर्ती से जुड़े हर छोटे-बड़ी शुद्धिपत्र की प्रामाणिक जानकारी केवल आयोग के आधिकारिक वेब पोर्टल mpsc.gov.in पर ही पब्लिश की जाएगी। जब तक नई तारीखें सामने नहीं आती हैं, तब तक उम्मीदवारों के पास मुख्य परीक्षा (Mains Exam) के स्तर की आंसर राइटिंग (विधि विषयों के मुख्य पेपर) की तैयारी को और धार देने का यह एक बेहतरीन और सुनहरा मौका साबित हो सकता है।

 

Latest Posts