सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बादलों का महाजाल! अगले 24 घंटे बेहद खौफनाक, इन राज्यों में 'रेड अलर्ट' जारी
जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून ने पूरे देश में रफ्तार पकड़ ली है। जून में कमजोर रही बारिश अब तेजी से बढ़ी है। लगातार हुई अच्छी वर्षा के कारण पूरे देश में बारिश की कमी घटकर केवल 12 प्रतिशत रह गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के उन सभी हिस्सों तक पहुंच जाएगा जहां अब तक इसकी पूरी एंट्री नहीं हुई थी।
अब सबसे बड़ी चिंता आम लोगों की सुरक्षा और बाढ़ जैसी स्थितियों को लेकर है। कई राज्यों में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। प्रशासन भी पूरी तैयारी में जुट गया है।
घने बादलों ने बढ़ाई चिंता, कई राज्यों में भारी बारिश का खतरा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की INSAT-3DS सैटेलाइट तस्वीरों में मध्य, पूर्वी और उत्तर भारत के ऊपर बड़े पैमाने पर बादलों का घना क्षेत्र दिखाई दिया है। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बंगाल की खाड़ी के ऊपर सबसे अधिक बादल मौजूद हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह संकेत है कि मानसून इस समय पूरी ताकत के साथ सक्रिय है। इसी वजह से गुजरात, मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। मानसून अब गुजरात, राजस्थान और हरियाणा के बाकी हिस्सों तक भी तेजी से पहुंच चुका है।
सरकार की नजर पूरे हालात पर, हुई उच्च स्तरीय समीक्षा
लगातार बदलते मौसम को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई जिसमें मानसून और खरीफ सीजन की स्थिति की समीक्षा की गई।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में इस बार मानसून सामान्य से करीब 10 दिन देर से पहुंचा था। लेकिन 7 जुलाई तक हुई तेज बारिश ने काफी हद तक इस कमी को पूरा कर दिया। अब पूरे देश में बारिश की कमी केवल 12 प्रतिशत रह गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो बनने की संभावना बनी हुई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में बारिश कम ही होगी। सरकार खास तौर पर जुलाई पर नजर बनाए हुए है क्योंकि पूरे मानसून सीजन की 30 प्रतिशत से ज्यादा बारिश इसी महीने में होती है।
एक साथ सक्रिय हुए कई मौसम तंत्र
वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय कई मौसम प्रणालियां एक साथ काम कर रही हैं। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र पहले अवसाद में बदला और अब मजबूत चक्रवाती परिसंचरण बन चुका है।
इसके असर से पूर्वी भारत, मध्य भारत और पश्चिमी तट पर बारिश काफी बढ़ गई है। कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में लगातार बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम राजस्थान से बांग्लादेश तक फैली मानसूनी ट्रफ, दक्षिण गुजरात से मध्य केरल तक बनी ऑफशोर ट्रफ और उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मिलकर पूरे मौसम को और मजबूत बना रहे हैं।
किस क्षेत्र में कैसा रहेगा मौसम
उत्तर-पश्चिम भारत
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में 11 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ बारिश होगी। 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और बिजली गिरने का भी खतरा है।
मध्य भारत
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में निम्न दबाव प्रणाली का असर सबसे ज्यादा दिखाई देगा। मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
पश्चिमी तट
कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ में इस सीजन की सबसे तेज बारिश हो सकती है। गुजरात में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे कई शहरों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत
बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों में व्यापक बारिश का अनुमान है।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय में लगातार वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है।
दक्षिण भारत
केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा।
तटीय और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में अत्यधिक भारी बारिश के साथ तेज आंधी और बिजली गिरने की संभावना है।
रेड अलर्ट वाले जिले और फ्लैश फ्लड का खतरा
मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के पालघर और गुजरात के अरावली, साबर कांठा, नवसारी, वलसाड, दादरा और नगर हवेली तथा दमन के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।
अगले 24 घंटे के दौरान मुंबई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, गोवा, पुणे, नासिक, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, भरूच, इंदौर, देवास, धार, होशंगाबाद और कर्नाटक के उडुपी तथा दक्षिण कन्नड़ में मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड का खतरा बताया गया है।
उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में भी कम से मध्यम स्तर की अचानक बाढ़ की आशंका है। इससे सड़क यातायात और सामान्य जीवन प्रभावित हो सकता है।