मिडल ईस्ट में महातनाव के बीच अचानक 6 देशों के दौरे पर निकले एस जयशंकर, जानें वजह

मिडल ईस्ट में महातनाव के बीच अचानक 6 देशों के दौरे पर निकले एस जयशंकर, जानें वजह

भारत की विदेश नीति के लिहाज से एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर विदेश मंत्री एस जयशंकर 5 जुलाई से छह देशों की अपनी हाई-प्रोफाइल यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं। 5 से 15 जुलाई तक चलने वाले इस रणनीतिक दौरे के दौरान जयशंकर कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, न्यूयॉर्क और ब्रुसेल्स जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में भारत के संबंधों को नया आयाम देना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की मजबूत दावेदारी के लिए अभियान शुरू करना और व्यापार व उन्नत तकनीक के मोर्चे पर यूरोपीय संघ (EU) के साथ रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना है।

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच खाड़ी देशों का रुख

जयशंकर की यात्रा का पहला चरण 5 से 10 जुलाई तक पूरी तरह खाड़ी क्षेत्र पर केंद्रित रहेगा। इस दौरान वे कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के शीर्ष नेतृत्व और विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में ईरान-इजराइल संघर्ष और अमेरिकी हमलों के कारण पश्चिम एशिया में भारी भू-राजनीतिक तनाव देखा गया है। हालांकि, मौजूदा युद्धविराम ने तात्कालिक संघर्ष को कुछ कम जरूर किया है, लेकिन समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं अब भी बरकरार हैं। ऐसे नाजुक माहौल में नई दिल्ली की यह राजनयिक पहल वैश्विक स्तर पर अपनी संवाद और स्थिरता की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

ऊर्जा सुरक्षा और लाखों प्रवासी भारतीयों के हितों पर जोर

भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र हमेशा से आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रहा है, क्योंकि यह देश भारत की कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की जरूरतों के सबसे बड़े स्रोत हैं। इसके अलावा, इन देशों में लाखों की संख्या में भारतीय प्रवासी समुदाय निवास करता है। जयशंकर की इस यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जारी अनिश्चितता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा करना है। बैठकों में द्विपक्षीय व्यापार सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर विस्तृत रोडमैप तैयार होने की उम्मीद है।

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