भजनलाल सरकार पर डोटासरा का तीखा हमला: राइट टू हेल्थ से लेकर बॉर्डर पर धार्मिक स्थलों की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (RPCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) कर सूबे की भजनलाल शर्मा सरकार को विभिन्न मोर्चों पर आड़े हाथों लिया। डोटासरा ने प्रदेश की चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं, अंतरराष्ट्रीय सीमा (Border) से सटे इलाकों में धार्मिक स्थलों पर प्रशासनिक कार्रवाई और कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा से जुड़े हालिया विवादों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
"राइट टू हेल्थ देने वाला राजस्थान अब दवाइयों को तरस रहा"
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोविंद सिंह डोटासरा ने सबसे बड़ा हमला स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बोला। उन्होंने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में राजस्थान 'राइट टू हेल्थ' (स्वास्थ्य का अधिकार) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को भी संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
डोटासरा ने सरकार पर कई संगीन आरोप लगाए:
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दवाइयों की भारी किल्लत: सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक और जरूरी दवाइयों का भारी टोटा है।
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खराब गुणवत्ता: जो दवाइयां अस्पतालों में मिल भी रही हैं, उनकी क्वालिटी बेहद घटिया और संदेहास्पद है।
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लापरवाही का आलम: सूबे में प्रसूताओं (गर्भवती महिलाओं) की मौत, इलाज में कोताही, कफ सिरप से बच्चों की मौत और मरीजों की किडनी फेल होने जैसे बेहद संवेदनशील मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
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कार्रवाई के नाम पर लीपापोती: हर बड़ी घटना के बाद सरकार सिर्फ जांच कमेटियां गठित कर देती है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाय केवल रिपोर्ट का इंतजार करती रहती है।
मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री को बताया संवेदनहीन
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और सूबे के चिकित्सा मंत्री पर जनता के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन होने का आरोप लगाया। उन्होंने सीजेरियन डिलीवरी (सिजेरियन ऑपरेशन) और प्रसूता महिलाओं को लेकर सत्तापक्ष की ओर से पूर्व में दिए गए कुछ बयानों पर गहरी आपत्ति जताई और कहा कि सरकार को महिलाओं के स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी से बचना चाहिए।
बॉर्डर पर धार्मिक स्थलों पर एक्शन: "सर्वदलीय बैठक बुलाए सरकार"
डोटासरा ने राजस्थान के सीमावर्ती जिलों (Border Areas) में मंदिरों, मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अभियान का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन बिना उचित प्रक्रिया के धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए बेहद कम समय का नोटिस (अल्टीमेटम) दे रहा है, जिससे सरहदी इलाकों में दोनों समुदायों के बीच बेवजह सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है और नाराजगी बढ़ रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर कांग्रेस का रुख: डोटासरा ने मांग की कि सरकार इन धार्मिक स्थलों को हटाने के पीछे की असली वजह को पूरी तरह स्पष्ट करे और इस मुद्दे पर तत्काल एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाए। हालांकि, उन्होंने कूटनीतिक रुख अपनाते हुए साफ किया कि यदि यह पूरा मामला 'राष्ट्रीय सुरक्षा' (National Security) से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है, तो कांग्रेस और पूरा विपक्ष राजनीति से ऊपर उठकर सरकार के फैसलों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
किरोड़ी लाल मीणा के करीबियों पर लगे आरोपों पर किया पलटवार
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा द्वारा विपक्ष पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए डोटासरा ने कहा कि खुद मंत्री के करीबी लोगों के पास से करोड़ों रुपये की बेहिसाब नकदी (Cash) बरामद होने की खबरें आईं, लेकिन इस पर सरकार ने कोई जवाबदेही तय नहीं की। उन्होंने कहा कि यदि किरोड़ी लाल मीणा खुद इस मामले की निष्पक्ष जांच (Fair Probe) की सिफारिश करते, तो जनता के बीच उनकी साख और मजबूत होती। डोटासरा ने इस मामले की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।