भगवान जगन्नाथ हुए बीमार: 15 दिन रहेंगे आइसोलेशन में, सिर्फ वैद्य करेंगे इलाज; जानें इस अनूठी और पावन परंपरा का पूरा रहस्य

भगवान जगन्नाथ हुए बीमार: 15 दिन रहेंगे आइसोलेशन में, सिर्फ वैद्य करेंगे इलाज; जानें इस अनूठी और पावन परंपरा का पूरा रहस्य

ज्येष्ठ पूर्णिमा के शाही स्नान के बाद बीमार हुए भगवान जगन्नाथ

आषाढ़ महीने की शुरुआत के साथ ही ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर सहित देश भर के जगन्नाथ मंदिरों से एक बेहद अनोखी और आस्था से भरी परंपरा की शुरुआत हो गई है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर 108 घड़ों के सुवासित जल से शाही स्नान (स्नान यात्रा) करने के बाद भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को तेज बुखार आ गया है। इस बीमारी के चलते भगवान को गर्भगृह से हटाकर एक विशेष विश्राम कक्ष में ले जाया गया है, जिसे 'अणसर घर' (Anasara Ghar) कहा जाता है।

15 दिनों के एकांतवास में लगेगा विशेष जड़ी-बूटियों और काढ़े का भोग

धार्मिक मान्यताओं और सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, बीमार होने के कारण भगवान अगले 15 दिनों तक पूरी तरह से एकांतवास यानी आइसोलेशन (क्वारंटीन) में रहेंगे। इस अवधि के दौरान मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे। भगवान का इलाज करने के लिए राजवैद्य को नियुक्त किया गया है, जो प्रतिदिन भगवान की सेहत की जांच करेंगे। इन 15 दिनों में भगवान को छप्पन भोग नहीं लगाया जाएगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए केवल तुलसी, सोंठ, जड़ी-बूटियों से बना विशेष काढ़ा और फलों के रस का ही भोग लगाया जाएगा।

स्वस्थ होने के बाद 'नवयौवन रूप' में दर्शन देकर शुरू करेंगे भव्य रथयात्रा

भगवान जगन्नाथ के इस 15 दिनों के बीमार होने और एकांतवास की अवधि को 'अणसर काल' कहा जाता है। इस दौरान भक्तों के लिए 'अलारनाथ मंदिर' में दर्शन की व्यवस्था की जाती है, जहां माना जाता है कि साक्षात जगन्नाथ जी निवास करते हैं। ठीक 15 दिनों के कड़े उपचार और विश्राम के बाद, भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर 'नवयौवन रूप' में अपने भक्तों को दर्शन देंगे। इसके तुरंत बाद ही विश्व प्रसिद्ध और भव्य 'जगन्नाथ रथयात्रा' (Jagannath Rath Yatra 2026) की शुरुआत होगी, जिसमें भगवान नगर भ्रमण पर निकलेंगे।

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