जब बजरंगबली की शक्ति भी पड़ गई थी कम, हनुमान जी को इन शूरवीरों के सामने झुकना पड़ा था!
भक्त शिरोमणि हनुमान जी की शक्ति के बारे में तो हर कोई जानता है। कहा जाता है कि वे अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता हैं और उनके एक प्रहार से पर्वत भी कांप उठते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे ग्रंथों में ऐसी भी कथाएं मिलती हैं जहाँ स्वयं पवनपुत्र हनुमान को भी अपने अहंकार या शक्ति के अहंकार को त्यागकर नतमस्तक होना पड़ा था? भगवान राम के भक्त हनुमान जी की विनम्रता का पाठ सिखाने के लिए स्वयं ईश्वर और उनके भक्तों ने कई बार लीलाएं रचीं। आइए जानते हैं उन प्रसंगों के बारे में, जहां हनुमान जी की भी शक्ति कम पड़ गई थी।
1. जब राम नाम के सामने नतमस्तक हुए हनुमान
एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान राम ने अयोध्या का राजा बनने के बाद एक यज्ञ किया, तो उन्होंने हनुमान जी को एक विशेष कार्य सौंपा। राम जी ने हनुमान जी को आदेश दिया कि वे साधु-संतों को निमंत्रण दें, लेकिन एक विशेष शर्त रखी कि जो व्यक्ति न्योता न स्वीकार करे, उसे जबरदस्ती ले आएं। जब हनुमान जी ऋषि विश्वामित्र को बुलाने गए, तो उन्होंने आने से मना कर दिया। हनुमान जी ने अपनी शक्ति का प्रयोग कर उन्हें ले जाने की कोशिश की, लेकिन ऋषि के तप के आगे उनकी सारी शक्ति व्यर्थ हो गई। अंत में, उन्हें समझ आया कि भक्ति और तप के सामने शारीरिक बल का कोई अर्थ नहीं है और वे नतमस्तक हो गए।
2. मद्रास (मदालसा) के प्रसंग में हनुमान की सीख
एक अन्य प्रसंग के अनुसार, एक बार हनुमान जी को अपनी शक्ति पर थोड़ा अहंकार हो गया था। तब भगवान राम ने उनकी परीक्षा लेने का निर्णय लिया। भगवान ने एक सूक्ष्म रूप धारण किया और हनुमान जी से कहा कि वे एक स्थान पर उन्हें ढूँढें। हनुमान जी ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी, पहाड़ों को हिला दिया, लेकिन वे राम जी को नहीं ढूंढ पाए। अंततः हनुमान जी को यह आभास हुआ कि वे भगवान की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिला सकते। यहां हनुमान जी की शक्ति कम नहीं थी, बल्कि यह उनकी भक्ति की परीक्षा थी कि वे अपनी अहंता को छोड़कर प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पित हों।
3. जब अर्जुन और कृष्ण के सामने झुकना पड़ा
महाभारत काल में भी एक कथा प्रसिद्ध है जहाँ हनुमान जी का अहंकार तोड़ने के लिए स्वयं भगवान कृष्ण ने लीला की थी। एक बार अर्जुन को अपने धनुर्विद्या पर गर्व हो गया था। हनुमान जी ने उसे तोड़ने के लिए एक चुनौती दी कि वे एक ऐसा पुल बनाएं जो उनके भार को सह सके। अर्जुन ने बहुत शक्तिशाली पुल बनाया, लेकिन हनुमान जी के पैर रखते ही वह टूट गया। तब कृष्ण जी की लीला से हनुमान जी को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने देखा कि यह केवल अहंकार का खेल है और सत्य की शक्ति के सामने कोई भी बलवान नहीं होता।
क्यों जरूरी है यह कथा?
ये सभी प्रसंग हमें सिखाते हैं कि हनुमान जी की शक्ति असीमित है, लेकिन उनके जीवन की सबसे बड़ी शक्ति उनकी 'विनम्रता' और 'राम भक्ति' है। वे हमें यह संदेश देते हैं कि संसार में चाहे कोई कितना भी बलवान क्यों न हो, ईश्वर की इच्छा और संतों की मर्यादा के सामने उसे हमेशा झुकना चाहिए। यह कथाएं हमें अहंकार से दूर रहने और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।