'यह पूरी तरह से नाइंसाफी है', अर्जेंटीना से हार के बाद मिस्र के कोच होसाम हसन का फूटा गुस्सा, रेफरी पर लगाए गंभीर आरोप

'यह पूरी तरह से नाइंसाफी है', अर्जेंटीना से हार के बाद मिस्र के कोच होसाम हसन का फूटा गुस्सा, रेफरी पर लगाए गंभीर आरोप

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट दौर में अर्जेंटीना के खिलाफ मिली 3-2 की हार के बाद मिस्र फुटबॉल टीम के खेमे में गहरा आक्रोश है। मैच के दौरान रेफरी के विवादित निर्णयों और VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मिस्र के कोच होसाम हसन ने इसे फुटबॉल के इतिहास का एक 'काला अध्याय' बताया है। उनका मानना है कि उनकी टीम को खेल के मैदान पर नहीं, बल्कि रेफरी की गलतियों और पक्षपाती फैसलों की वजह से हराया गया है। कोच के इन गंभीर आरोपों के बाद फीफा के गलियारों में हड़कंप मच गया है।

गोल रद्द होने से लेकर पेनल्टी तक, रेफरी के फैसलों पर उठे सवाल

मिस्र के कोच होसाम हसन ने मैच के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर फीफा के मानकों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि 58वें मिनट में मिस्र का जो गोल रद्द किया गया, वह पूरी तरह से वैध था, लेकिन उसे तकनीकी बारीकियों में उलझाकर अमान्य करार दे दिया गया। वहीं, दूसरी ओर मैच के अंतिम क्षणों में जब मिस्र के स्टार खिलाड़ी मोहम्मद सलाह को अर्जेंटीना के पेनल्टी बॉक्स में गिराया गया, तो रेफरी ने न तो पेनल्टी दी और न ही वीएआर (VAR) की मदद लेने की जहमत उठाई। कोच का कहना है कि यह दोहरे मानदंड (double standards) साफ तौर पर किसी खास टीम को फायदा पहुंचाने के लिए अपनाए गए थे।

'FIFA का मकसद मेसी और अर्जेंटीना को बचाना था'

कोच होसाम हसन का सबसे विस्फोटक बयान तब आया जब उन्होंने फीफा की निष्पक्षता पर सीधा हमला किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखे लहजे में कहा कि यह मैच किसी साधारण हार की तरह नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फीफा और टूर्नामेंट के आयोजक किसी भी कीमत पर यह चाहते हैं कि डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी टूर्नामेंट से बाहर न हों। कोच के अनुसार, यही वजह थी कि मैच के महत्वपूर्ण पलों में फैसले अर्जेंटीना के पक्ष में झुके हुए थे, जिससे मिस्र की मेहनत पर पानी फिर गया।

नस्लीय टिप्पणी और सुरक्षा को लेकर भी बढ़ी चिंता

सिर्फ रेफरी के फैसले ही नहीं, मिस्र ने इस मैच के दौरान एक और संवेदनशील मुद्दा उठाया है। मिस्र फुटबॉल संघ का दावा है कि मैच के दौरान उनके खिलाड़ियों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियां (racial slurs) की गईं, लेकिन रेफरी ने इस पर कोई आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं अपनाया। कोच होसाम हसन ने कहा कि खिलाड़ी इस तरह के अपमानजनक माहौल में फुटबॉल नहीं खेल सकते। मिस्र ने फीफा के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के साथ-साथ उन फैसलों की समीक्षा की मांग की है, जिन्होंने मैच का रुख बदल दिया।

क्या फीफा लेगा कोई बड़ा निर्णय?

फीफा के नियमों के अनुसार, मैच के नतीजों को बदला जाना लगभग असंभव होता है, लेकिन मिस्र के इस आक्रामक रुख ने टूर्नामेंट की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया और फुटबॉल प्रशंसकों के बीच अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई रेफरी ने अर्जेंटीना को बचाने के लिए पक्षपात किया? अब पूरी दुनिया की नजरें फीफा की अनुशासनात्मक समिति पर टिकी हैं कि वे मिस्र द्वारा की गई शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और क्या इस 'नाइंसाफी' का कोई समाधान निकाला जाएगा या फिर यह मामला सिर्फ कागजों में दबकर रह जाएगा।

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