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यूपी में एनकाउंटर पर अपनों ने ही घेरी योगी सरकार, संजय निषाद के बाद अब कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने भी पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में हुए कमलेश बिंद पुलिस एनकाउंटर मामले ने अब एक नया और बेहद संवेदनशील राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस एनकाउंटर को लेकर विपक्षी दलों के हमलों के बीच अब खुद योगी सरकार के भीतर से ही बगावती सुर तेज होने लगे हैं। निषाद पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद द्वारा इस एनकाउंटर पर उंगली उठाए जाने के बाद, अब उत्तर प्रदेश सरकार में सहयोगी दल सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) के मुखिया और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अपनी ही सरकार की पुलिसिया कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ओपी राजभर ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग का खुलकर समर्थन किया है, जिससे प्रदेश के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

अगर संजय निषाद सवाल उठा रहे हैं तो जरूर कुछ बात होगी, राजभर का अपनी ही पुलिस पर बड़ा हमला

सोमवार को सुभासपा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर एनकाउंटर मामले में बड़ा बयान देते हुए अपने सहयोगी मंत्री संजय निषाद के सुर में सुर मिलाया। राजभर ने साफ तौर पर कहा कि अगर डॉ. संजय निषाद इस एनकाउंटर की जांच की मांग कर रहे हैं, तो जाहिर सी बात है कि उनके पास इस घटना से जुड़ी कुछ पुख्ता और अंदरूनी जानकारियां जरूर होंगी। राजभर ने दो टूक शब्दों में कहा कि न्याय के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच होनी ही चाहिए। उनके इस बयान के बाद अब यूपी पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई पर सरकार के भीतर ही सहमति बनती नहीं दिख रही है, जिससे कानून व्यवस्था के दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सिर्फ 38 दिन पहले सिर पर सेहरा सजाने वाले कमलेश बिंद के एनकाउंटर की क्या है असली इनसाइड स्टोरी

इस पूरे सियासी घमासान की शुरुआत गाजीपुर में हुई एक सनसनीखेज हत्या से जुड़ी है। बीते 29 मई की रात को गाजीपुर में एक प्रतिष्ठित होटल कारोबारी के युवा बेटे विनीत राय की सरेआम गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि इलाके के कुख्यात 'कटरा गैंग' ने कारोबारी से ₹1 करोड़ की भारी-भरकम रंगदारी मांगी थी और रकम न मिलने पर इस खूनी वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने गैंग के सरगना शंकर पांडेय और कमलेश बिंद समेत कई लोगों को नामजद करते हुए सरगर्मी से तलाश शुरू की थी। इसी बीच, बीते बुधवार की रात पुलिस ने एक मुठभेड़ में कमलेश बिंद को मार गिराने का दावा किया। इस घटना में चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि मारे गए कमलेश की महज 38 दिन पहले ही शादी हुई थी। कमलेश के परिजनों का सीधा आरोप है कि पुलिस उसे घर से उठाकर ले गई थी और बाद में उसकी फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई।

पुलिस अंग्रेजों के दौर की तरह काम कर रही है, संजय निषाद ने जातिगत भेदभाव का भी लगाया गंभीर आरोप

इससे पहले निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मंत्री संजय निषाद ने इस एनकाउंटर पर बेहद तीखे सवाल खड़े करते हुए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सनसनी फैला दी थी। उन्होंने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली की तुलना ब्रिटिश हुकूमत से करते हुए कहा था कि पुलिस बिना किसी अदालती जांच के इस तरह सरेआम खुद ही सजा तय कर रही है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने यहां तक चेतावनी दे दी थी कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाइयों का भारी नुकसान भाजपा गठबंधन को आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में उठाना पड़ सकता है। संजय निषाद ने जातिगत एंगल को हवा देते हुए कहा था कि इस केस का मुख्य आरोपी एक ब्राह्मण (शंकर पांडेय) है, इसलिए उसका एनकाउंटर नहीं हुआ, जबकि उनके समाज के लड़के कमलेश बिंद को मार गिराया गया। उन्होंने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के उस बयान पर भी तीखी नाराजगी जताई जिसमें उन्होंने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया था। संजय निषाद ने साफ कहा कि अगर शाही अपने समाज के साथ हैं, तो वह भी अपने बिंद समाज के हक के लिए पीछे नहीं हटेंगे।

अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना, कहा- भाजपा राज में महाभ्रष्ट शासन-प्रशासन ने जनता का विश्वास खोया

योगी सरकार के मंत्रियों के अलावा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इस एनकाउंटर को लेकर लगातार हमलावर हैं। कमलेश बिंद की मौत के बाद गांव में हुए भारी बवाल, पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़ की घटनाओं का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि भाजपा राज में इस महाभ्रष्ट शासन और प्रशासन ने आम जनता का भरोसा पूरी तरह से खो दिया है। यूपी में लगातार हो रही हत्याओं और फर्जी एनकाउंटरों ने राज्य की छवि को पूरे देश में बेहद नकारात्मक बना दिया है। अखिलेश ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि असली गुनहगार तो कानून को अपने हाथ में लेकर खुद लखनऊ के ऊंचे सिंहासनों पर बैठे हुए हैं।

 

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