राम मंदिर दान विवाद पर अखिलेश का तंज, बोले- देवता का धन सुरक्षित नहीं, तो निवेशक कैसे करेंगे भरोसा
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब एक बहुत बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक राजनीतिक विवाद में तब्दील हो चुका है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को इस संवेदनशील मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार को आड़े हाथों लिया। अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस 'कैश कांड' और गबन की गूंज पूरी दुनिया में फैल चुकी है, जिससे वैश्विक स्तर पर सनातन धर्म के अनुयायियों और दानदाताओं में भारी आक्रोश और शर्मिंदगी का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस महा-विवाद के कारण विदेशों में भारत की छवि को गहरा कूटनीतिक धक्का लगा है।
'पूरी दुनिया में फैली बदनामी'— सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अखिलेश का बड़ा बयान
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X पर एक बेहद कड़ा और लंबा पोस्ट साझा करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट और सत्तापक्ष पर तीखे कूटनीतिक प्रहार किए। अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा: "अयोध्या मंदिर से चढ़ावे, दान और भेंट की चोरी की सनसनीखेज खबर अब पूरी दुनिया में फैल गई है। विभिन्न देशों में रहने वाले सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायी भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा फैलाई गई इस बदनामी से बेहद शर्मिंदा और आहत हैं। वे इसलिए भी दुखी हैं क्योंकि उनमें से अनगिनत लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई से मंदिर निर्माण के लिए भारी दान दिया था या व्यक्तिगत रूप से मूल्यवान भेंट चढ़ाई थी।"
निवेशकों का टूटेगा भरोसा, देश को होगा भारी आर्थिक नुकसान
सपा प्रमुख ने इस कूटनीतिक विवाद को उत्तर प्रदेश और देश के आर्थिक भविष्य से जोड़ते हुए एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ "अधार्मिक तत्वों" की कथित संलिप्तता और भ्रष्टाचार के कारण देश की अंतरराष्ट्रीय साख मिट रही है। अखिलेश के मुताबिक, इस विवाद का सीधा असर भारत में आने वाले विदेशी निवेश (FDI) पर पड़ेगा। उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया भर के बड़े निवेशक अब उत्तर प्रदेश से अपना पैर पीछे खींच सकते हैं, क्योंकि उनके मन में यह गंभीर कूटनीतिक सवाल खड़ा हो गया है कि जो सरकार अपने ही आराध्य देवता को चढ़ाए गए दान की रक्षा नहीं कर सकती, वह भविष्य में कॉरपोरेट कंपनियों के अरबों रुपये के पूंजी निवेश की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगी?