जिम्स अस्पताल विवाद: कर्मचारियों के समर्थन में सड़कों पर उतरी सपा, ग्रेटर नोएडा में हाईवे जाम से थमी रफ्तार
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित जिम्स (GIMS - राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान) अस्पताल का आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और कानून-व्यवस्था के संकट में तब्दील हो गया है। बुधवार रात को पुलिस द्वारा धरना दे रहे कर्मचारियों को हटाने और कथित बल प्रयोग के विरोध में गुरुवार (25 जून 2026) को समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ता उग्र प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतर आए।
सैकड़ों की संख्या में पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कलेक्ट्रेट के सामने सूरजपुर-परी चौक मुख्य मार्ग को पूरी तरह ठप (चक्काजाम) कर दिया है। इस अचानक हुए प्रदर्शन के कारण दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाली इस मुख्य लाइफलाइन पर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे आम राहगीर चिलचिलाती धूप में बेहाल हैं।
बुधवार रात की पुलिसिया कार्रवाई से भड़का गुस्सा
मामले की शुरुआत जिम्स अस्पताल के करीब 700 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के शांतिपूर्ण आंदोलन से हुई थी, जो अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे।
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देर रात एक्शन: बुधवार रात को प्रशासन और पुलिस बल ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर इन कर्मचारियों को वहां से खदेड़ दिया।
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बर्बरता का आरोप: समाजवादी पार्टी का आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे गरीब कर्मचारियों पर रात के अंधेरे में बर्बरता दिखाई और बल प्रयोग किया, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी के विरोध में गुरुवार सुबह सपा के कार्यकर्ता कर्मचारियों के समर्थन में लामबंद हो गए।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस में तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की
हाईवे जाम किए जाने की सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल कलेक्ट्रेट और सूरजपुर मार्ग पर तैनात कर दिया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारी सपा कार्यकर्ताओं को सड़क से हटाने के प्रयास में पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और खींचतान देखने को मिली।
जनता परेशान, प्रशासनिक अमला मुस्तैद: चक्काजाम की वजह से सड़कों पर गाड़ियां रेंग रही हैं। घंटों से जाम में फंसे लोग प्रशासन से रास्ता खुलवाने की गुहार लगा रहे हैं। पुलिस के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और प्रदर्शन कर रहे सपा नेताओं को समझाने-बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, कार्यकर्ता अभी भी सड़क पर डटे हुए हैं और योगी सरकार व स्थानीय जिला प्रशासन के खिलाफ लगातार नारेबाजी कर रहे हैं।
यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है, जिससे आने वाले दिनों में नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में प्रशासनिक और सियासी सरगर्मियां और तेज होने की उम्मीद है।