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दुनिया की सांसें थमीं! ईरान ने दी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी तरह ब्लॉक करने की धमकी, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लग सकती है आग

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) से इस वक्त एक ऐसी खौफनाक और दुनिया को दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। इजरायल और लेबनान के बीच भड़के ताजा युद्ध के बाद अब ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से बंद करने का अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है। ईरान के इस आक्रामक कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई ठप होने और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के मुताबिक, तेहरान अब न सिर्फ होर्मुज को चोक करने जा रहा है, बल्कि वह लाल सागर के पास स्थित 'बाब अल-मंदेब' जलडमरूमध्य समेत कई अन्य सैन्य मोर्चों को भी एक साथ एक्टिव करने की फुलप्रूफ तैयारी में है।

इजरायल की घुसपैठ से भड़का ईरान, अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता को तुरंत किया सस्पेंड

ईरान का यह बेहद आक्रामक फैसला इजरायल द्वारा लेबनान की सीमा में घुसकर की जा रही भीषण सैन्य कार्रवाई के जवाब में आया है। इजरायली सेना पिछले 26 वर्षों में सबसे गहरी घुसपैठ करते हुए लेबनान के ऐतिहासिक इलाकों पर कब्जा कर चुकी है और बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर लगातार बम बरसा रही है। इसके जवाब में हिजबुल्लाह भी उत्तरी इजरायल पर लगातार रॉकेट दाग रहा है। ईरान ने सीधे तौर पर इजरायल पर संघर्षविराम (सीजफायर) की शर्तों को तार-तार करने का आरोप लगाया है। इसी आक्रोश में ईरान ने ओमान और अन्य देशों के माध्यम से अमेरिका के साथ चल रही अपनी सभी अप्रत्यक्ष और गोपनीय वार्ताओं को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने दो टूक लहजे में साफ कर दिया है कि जब तक इजरायल गाजा और लेबनान की धरती से अपनी सेनाओं को पूरी तरह पीछे नहीं हटा लेता, तब तक वाशिंगटन के साथ बातचीत की मेज पर बैठने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

'जियोनी अपराधों' का मिलेगा कड़ा बदला, प्रतिरोध मोर्चा खोलने की घोषणा

ईरानी नेतृत्व और उनकी सेना (IRGC) के अनुसार, इजरायल के इन कथित 'जियोनी अपराधों' और उसके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए ही 'प्रतिरोध मोर्चे' (Axis of Resistance) ने एकजुट होकर होर्मुज स्ट्रेट की पूर्ण नाकाबंदी करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। ईरान का कहना है कि अब इजरायल के खिलाफ एक बिल्कुल नया और बेहद खतरनाक मोर्चा खुलने जा रहा है। हिजबुल्लाह, हूती और अन्य सहयोगी गुटों के जरिए इजरायल को चारों तरफ से घेरने की रणनीति बनाई गई है। इस बेहद विस्फोटक स्थिति ने पूरे मध्य पूर्व को बारूद के ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिससे वैश्विक महाशक्तियों के बीच सीधे सैन्य टकराव की आशंका काफी प्रबल हो गई है।

"ईरान बेहतर बातचीत करने वाला लेकिन कमजोर लड़ाकू..." धमकी पर बोले डोनाल्ड ट्रंप

ईरान द्वारा वैश्विक तेल मार्ग को बंद करने की इस खुली चुनौती पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि व्हाइट हाउस को ईरान के इस औचक फैसले की पहले से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ईरान पर तंज कसते हुए उसे एक "बेहतर बातचीत करने वाला लेकिन बेहद कमजोर लड़ाकू" करार दिया। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके इस बयान का मतलब ईरान पर अमेरिकी बमबारी शुरू करना कतई नहीं है। अमेरिका फिलहाल सीधे सैन्य टकराव की स्थिति से बचना चाहता है, लेकिन वह किसी भी कीमत पर होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य नाकाबंदी और निगरानी को कमजोर नहीं होने देगा।

भारत समेत पूरी दुनिया पर मंडराया मंदी का खतरा, चरमरा सकती है अर्थव्यवस्था

'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। इस संकरे समुद्री रास्ते से रोजाना करोड़ों बैरल कच्चे तेल का परिवहन होता है, जो दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। यदि ईरान ने अपनी धमकी पर अमल करते हुए इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया, तो वैश्विक तेल बाजार पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है। इसका सबसे घातक और सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ेगा। भारत अपनी घरेलू जरूरतों का करीब 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल खाड़ी देशों से आयात करता है। इस रूट के बंद होने से न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी, बल्कि पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने से देश में महंगाई और मुद्रास्फीति बेकाबू हो सकती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ देगी।

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