हमास का ऐतिहासिक फैसला: गाजा की सत्ता छोड़ने के ऐलान के क्या हैं मायने; आसान भाषा में समझिए पूरी इनसाइड स्टोरी
मध्य पूर्व (Middle East) की राजनीति और दशकों पुराने इजरायल-फिलिस्तीन विवाद में एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ आ गया है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक असंभव मानी जा रही थी। फिलिस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास (Hamas) ने आधिकारिक तौर पर गाजा पट्टी (Gaza Strip) की सत्ता और प्रशासनिक नियंत्रण छोड़ने का बड़ा ऐलान कर दिया है। साल 2007 से गाजा पर एकछत्र राज करने वाले हमास के इस फैसले ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक (Geopolitical) समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने सालों तक इजरायल से लोहा लेने वाले संगठन ने अचानक घुटने क्यों टेके या सत्ता क्यों छोड़ दी? आइए, बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि हमास के इस बड़े ऐलान का असली मतलब क्या है और इससे गाजा का भविष्य कैसे बदलेगा।
सबसे पहले समझें: आखिर हमास ने यह फैसला क्यों लिया?
लंबे समय से चल रहे भीषण युद्ध, इजरायली सेना (IDF) की लगातार बमबारी और चौतरफा नाकेबंदी के कारण गाजा पट्टी पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुकी है। हमास के इस पीछे हटने के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं:
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सैन्य और प्रशासनिक ढांचा तबाह होना: इजरायल के लगातार हमलों में हमास के शीर्ष नेतृत्व (Top Leadership), लड़ाकों और उनकी सुरंगों (Tunnels) के नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है। अब हमास के लिए गाजा की व्यवस्था चलाना नामुमकिन हो गया था।
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अभूतपूर्व मानवीय संकट: गाजा में भोजन, पानी, बिजली और दवाओं की भारी किल्लत है। स्थानीय जनता के बीच बढ़ते असंतोष और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण हमास चौतरफा घिर चुका था।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ना: गाजा के पुनर्निर्माण (Reconstruction) के लिए अरब देश और वैश्विक संस्थाएं तब तक पैसा देने को तैयार नहीं थीं, जब तक वहां हमास का शासन रहता।
आसान भाषा में समझिए: हमास के इस ऐलान का 'मतलब' क्या है?
हमास द्वारा सत्ता छोड़ने के इस ऐलान को हम कुछ बेहद सरल बिंदुओं के जरिए समझ सकते हैं:
1. गाजा में अब 'हमास की सरकार' नहीं होगी
इसका सीधा मतलब यह है कि गाजा पट्टी में जो मंत्रालय, पुलिस व्यवस्था, स्कूल, अस्पताल और टैक्स वसूलने का काम अब तक हमास के नियंत्रण में था, वह अब उसके हाथ में नहीं रहेगा। हमास अब वहां की प्रशासनिक सरकार नहीं कहलाएगा।
2. फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) या टेक्नोक्रेट सरकार की वापसी
हमास ने सत्ता किसी तीसरे देश को नहीं सौंपी है, बल्कि कयास लगाए जा रहे हैं कि गाजा का नियंत्रण अब फिलिस्तीनी प्राधिकरण (Palestinian Authority - PA) को सौंपा जा सकता है, जो वर्तमान में वेस्ट बैंक (West Bank) पर शासन करता है। या फिर एक ऐसी 'टेक्नोक्रेट सरकार' (विशेषज्ञों की गैर-राजनीतिक सरकार) बनाई जाएगी, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अरब देशों (जैसे मिस्र, कतर, यूएई) का समर्थन प्राप्त हो।
3. गाजा के पुनर्निर्माण का रास्ता साफ
चूंकि अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देश हमास को एक आतंकवादी संगठन मानते हैं, इसलिए वे गाजा की मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ा रहे थे। अब हमास के हटने से संयुक्त राष्ट्र (UN) और अमीर खाड़ी देश गाजा को दोबारा बसाने और अरबों डॉलर का फंड जारी करने के लिए आगे आ सकेंगे।
4. इजरायल के सैन्य ऑपरेशंस पर लग सकता है ब्रेक
इजरायल का घोषित लक्ष्य 'हमास का खात्मा' और उसे सत्ता से बेदखल करना था। हमास द्वारा खुद ही सत्ता छोड़ देने के बाद, इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध को पूरी तरह रोकने और अपनी सेना को गाजा से वापस बुलाने का भारी दबाव बनेगा।
क्या हमास का अस्तित्व हमेशा के लिए खत्म हो गया?
बिल्कुल नहीं। यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि हमास ने सिर्फ 'प्रशासनिक सत्ता' (Governance) छोड़ी है, अपने हथियार नहीं डाले हैं। हमास एक राजनीतिक और सैन्य संगठन के साथ-साथ एक विचारधारा भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हमास अब पर्दे के पीछे रहकर एक 'गुरिल्ला संगठन' या एक विशुद्ध राजनीतिक दल के रूप में काम कर सकता है। वह भविष्य में होने वाले फिलिस्तीनी चुनावों का हिस्सा बनने की कोशिश जरूर करेगा, लेकिन फिलहाल उसने गाजा को मलबे से निकालने के लिए खुद को शासन से दूर कर लिया है।