क्या प्रवासी मजदूरों के घर वापसी से बढ़ रहा कोरोना का मामला? बिहार-यूपी-झारखंड का सच

भारत में कोरोना का मामला लगातार बढ़ते ही जा रहा है. आपको बता दें कि ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लोगों के मूवमेंट को रोकना बेहद जरूरी है। करीब दो महीने पहले जब देशव्‍यापी लॉकडाउन की घोषणा हुई थी, तो उसका मकसद यही था। मगर इससे एक नया संकट खड़ा हो गया।

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वहीं दूसरे राज्‍यों में जाकर काम करने वाले लोग वहीं फंस गए। इनमें बड़ी आबादी ऐसी थी जो डेली मजदूरी कर अपना पेट पालती थी। यातायात के साधन बंद हुए तो बहुत से प्रवासी मजदूर पैदल ही घर की ओर चल दिए। बाद में उनके लिए ट्रेनें और बसें चलाई गईं। ये मजदूर अपने घर तो पहुंच गए मगर क्‍या कोरोना भी साथ लाए हैं?

गौरतलब है कि केंद्र सरकार समेत कई विशेषज्ञ यह अंदाजा लगा रहे थे कि इस पलायन की वजह से कोरोना वायरस के मामलों की संख्‍या बढ़ेगी। 1 मई से मजदूरों के लिए ‘श्रमिक स्‍पेशल’ ट्रेनें शुरू की गई हैं। इसके बाद से, ग्रामीण इलाकों में कोरोना के केसेज की नई लहर देखने को मिली है।
वहीं कई ऐसे इलाके जहां कोरोना के मामले नहीं थे, अचानक से कोविड-19 मैप पर आ गए हैं। उत्‍तर प्रदेश हो या चाहे बिहार, जिन जिलों में लोग बाहर से लौटे हैं, कोरोना का आंकड़ा बढ़ा रहे हैं। ये वो जिले हैं जहां अबतक कोरोना के मरीजों की संख्‍या 50 या उससे भी कम थी। मगर प्रवासी श्रमिकों के लौटने से मरीजों की तादाद दोगुने से भी ज्‍यादा हो गई है।
बता दें कि यूपी का बाराबंकी जिला कुछ दिनों पहले तक ग्रीन जोन में था। वहां प्रवासी श्रमिकों के आने के बाद कोरोना बम फूटा है। बुधवार को यहां एक साथ 95 मरीज सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से 49 मामले प्रवासी श्रमिकों से जुड़े हैं। डीएम आदर्श सिंह के निर्देश पर 15-16 मई को बाराबंकी में 245 लोगों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें 95 की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। इनमें से 46 लोग पहले से संक्रमित 6 लोगों के संपर्क में आए थे। बाकी 49 लोग अन्य प्रदेशों व जिलों से आए हैं। डीएम के मुताबिक, जिले में ऐक्टिव केस की संख्या 121 हो गई है।

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