झारखंड में ₹3 करोड़ का ऑनलाइन सट्टेबाजी स्कैम, गेमिंग ऐप से रातों-रात अमीर बनाने का झांसा देकर बिछाया था जाल
झारखंड में डिजिटल अवेयरनेस और साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों के बीच ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी (Online Betting) के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। झारखंड पुलिस ने अवैध सट्टेबाजी ऐप्स और वेबसाइट्स के जरिए मासूम लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस हाई-टेक घोटाले में पुलिस ने हजारीबाग जिले से 28 वर्षीय एक शातिर युवक को धर दबोचा है। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आरोपियों ने महज कुछ ही समय के भीतर ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लोगों को अंधाधुंध मुनाफे का लालच दिया और करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर दिया।
कोर्रा इलाके में पुलिस की सीक्रेट रेड, मोबाइल खोलते ही उड़े अधिकारियों के होश
ऑनलाइन सट्टेबाजी के इस काले कारोबार की भनक हजारीबाग पुलिस को काफी समय से लग रही थी। पुलिस को मिली एक बेहद पुख्ता और गुप्त सूचना के आधार पर रविवार को हजारीबाग के कोर्रा थाना क्षेत्र में एक विशेष टीम बनाकर अचानक छापेमारी (रेड) की गई। इस त्वरित कार्रवाई के दौरान पुलिस ने राहुल कुमार नामक युवक को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपी राहुल के पास से दो हाई-एंड स्मार्टफोन बरामद हुए। जब साइबर सेल और स्थानीय पुलिस ने इन मोबाइल फोन्स की गहराई से तकनीकी जांच की, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। उन मोबाइलों में तीन बेहद सक्रिय और पूरी तरह से अवैध ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट्स लाइव लॉग-इन थीं, जिनके जरिए पूरा सिंडिकेट चलाया जा रहा था।
डिजिटल वॉलेट और बैंक खातों से हुआ ₹3 करोड़ का लेन-देन, थाना प्रभारी ने किया खुलासा
कोर्रा थाना प्रभारी नेमधारी रजक ने इस पूरे सिंडिकेट का ब्यौरा देते हुए मीडिया को बताया कि पकड़े गए आरोपी के मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच में अब तक 3 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन (ट्रांजैक्शंस) का पुख्ता पता चला है। पुलिस की शुरुआती पूछताछ और डिजिटल ट्रेल से यह साफ संकेत मिले हैं कि आरोपी राहुल बेहद शातिर तरीके से पिछले लंबे समय से ऑनलाइन सट्टेबाजी के इस अंतर-जिला नेटवर्क का संचालन कर रहा था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस सट्टेबाजी के पैसे को खपाने के लिए किन-किन फर्जी बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स का इस्तेमाल किया गया था।
'चचेरे भाई' के साथ मिलकर रचा था चक्रव्यूह, पहले देते थे प्रॉफिट फिर कर देते थे अकाउंट साफ
कड़ी पूछताछ के सामने आरोपी राहुल कुमार ज्यादा देर टिक नहीं सका और उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरे नेक्सस का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। राहुल ने बताया कि वह अपने चचेरे भाई प्रिंस कुमार के साथ मिलकर इस अवैध बेटिंग वेबसाइट्स और ऐप्स के साम्राज्य को संभालता था। इनका काम सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और आम लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना था। ये लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने और पैसे दोगुने करने का झांसा देकर अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ते थे। शुरुआत में खेल को भरोसेमंद बनाने के लिए ये लोग पीड़ितों को कुछ छोटा-मोटा प्रॉफिट (लाभ) भी उनके स्क्रीन पर दिखाते थे, लेकिन जैसे ही पीड़ित भरोसे में आकर बड़ी रकम का निवेश करता था, ये उसका अकाउंट ब्लॉक कर पूरी रकम हड़प लेते थे।
रांची से लेकर रामगढ़ और चतरा तक फैला था सट्टेबाजी का जाल, फरार प्रिंस की तलाश में छापेमारी
झारखंड पुलिस के मुताबिक, इस शातिर गिरोह की जड़ें केवल हजारीबाग तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि इन्होंने पूरे राज्य में अपना नेटवर्क फैला रखा था। आरोपियों ने ऑनलाइन माध्यम और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप्स का सहारा लेकर रांची, रामगढ़, चतरा और हजारीबाग समेत झारखंड के कई प्रमुख जिलों में बड़ी संख्या में लोगों को अपने इस मायाजाल में फंसाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं और ऑनलाइन जुआ प्रोत्साहन एवं विनियमन अधिनियम, 2025 के तहत एक आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने इस केस के मुख्य मास्टरमाइंड और फिलहाल फरार चल रहे प्रिंस कुमार की गिरफ्तारी के लिए राज्य के अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है।