AISHE रिपोर्ट का खुलासा: निजी विश्वविद्यालयों की बाढ़, फिर भी सरकारी संस्थानों का कायम है दबदबा
उच्च शिक्षा पर हाल ही में जारी 'ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन' (AISHE 2023-24) की रिपोर्ट ने देश के शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव को उजागर किया है। पिछले एक दशक (2013-14 से 2023-24) में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या में विस्फोटक वृद्धि हुई है, लेकिन इसके बावजूद छात्र नामांकन के मामले में सरकारी विश्वविद्यालयों का वर्चस्व अभी भी बरकरार है।
निजी विश्वविद्यालयों की तेज रफ्तार
AISHE आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या में 149% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। जहाँ 2013-14 में देश में केवल 219 निजी विश्वविद्यालय थे, वहीं 2023-24 तक इनकी संख्या बढ़कर 546 हो गई है। इसके विपरीत, इसी अवधि में सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या में केवल 45.4% की वृद्धि हुई (504 से बढ़कर 733)। साफ है कि निजी क्षेत्र सरकारी क्षेत्र की तुलना में तीन गुना तेजी से विस्तार कर रहा है।
नामांकन में सरकारी संस्थानों का दबदबा
संख्या में तेजी के बावजूद, अधिकांश भारतीय छात्र अभी भी सरकारी विश्वविद्यालयों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
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सरकारी संस्थान: 2023-24 में लगभग 68.1% छात्र सरकारी विश्वविद्यालयों में नामांकित हैं। हालांकि यह आंकड़ा 2013-14 के 81.3% से कम हुआ है, लेकिन फिर भी यह दो-तिहाई से अधिक है।
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निजी संस्थान: निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों का नामांकन 11.9 लाख (2013-14) से बढ़कर 34.6 लाख (2023-24) तक पहुंच गया है, जो कि इनकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
क्षेत्रीय प्रभाव और शिक्षा का विस्तार
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना में सबसे आगे रहा है, जिसने एक दशक में 51 नए संस्थान जोड़े हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या में शीर्ष पर बना हुआ है। इसके अलावा, भारत का सकल नामांकन अनुपात (GER) 2013-14 के 23.0 से बढ़कर 2023-24 में 30.0 हो गया है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी (GER 31.2) पुरुषों (28.9) से अधिक रही है।