ओडिशा स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव: अब किताबों की शुद्धता पर जनता की मुहर, कक्षा 1-4 की नई बुक्स पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला
Odisha School Textbooks Update: शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखने के लिए ओडिशा सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। हाल ही में कक्षा 1 से 4 तक की पाठ्यपुस्तकों में गंभीर त्रुटियां सामने आने के बाद राज्य का स्कूल और जन शिक्षा विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। इस विवाद के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब किताबें छपने से पहले उनकी समीक्षा खुद आम जनता, अभिभावक और विषय विशेषज्ञ करेंगे। राज्य सरकार की इस पहल से अब यह तय होगा कि हमारे बच्चों के बस्तों में कैसी किताबें होंगी।
किताबों में गलती और विवाद की असली वजह
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जारी नई पाठ्यपुस्तकों में कई ऐसी त्रुटियां देखने को मिलीं जिसने पूरे शिक्षा तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया था। किताबों में ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना, वर्तनी की गंभीर गलतियां और यहाँ तक कि पाठ्यक्रम में बेतुके शब्दों का समावेश होने से अभिभावकों में भारी आक्रोश था। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए ओडिशा सरकार ने न केवल जिम्मेदारी तय की, बल्कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए एक पारदर्शी 'डिजिटल रिव्यू' प्रक्रिया शुरू की है।
क्या है सरकार की नई योजना?
राज्य सरकार ने अब संशोधित डिजिटल ड्राफ्ट को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों जैसे (SME, OSEPA, और SCERT) पर अपलोड कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी नागरिक, शिक्षक या शिक्षाविद इन किताबों को पढ़कर अपनी राय दे सकता है। फीडबैक के लिए 7 दिनों का समय निर्धारित किया गया है, जिसके बाद मिले सुझावों के आधार पर किताबों में अंतिम सुधार किए जाएंगे। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य किताबों को त्रुटिहीन बनाना है ताकि छात्रों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो।
अधिकारियों पर गिरी गाज और सुधार का संकल्प
इस पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने के कारण सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए एससीईआरटी (SCERT) के पूर्व निदेशक समेत चार उच्च अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक नई किताबें प्रिंट होकर नहीं आ जातीं, तब तक वे संशोधित डिजिटल सामग्री के जरिए ही बच्चों को शिक्षा प्रदान करें।