CBSE 12वीं मूल्यांकन फॉर्मूला: असेसमेंट से नाखुश विदेश में पढ़ रहे छात्रों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के 12वीं कक्षा के मूल्यांकन फॉर्मूले (Assessment Formula) को लेकर विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। बोर्ड द्वारा तय किए गए आंतरिक मूल्यांकन के अंकों से असंतुष्ट और विदेशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों ने अब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर छात्रों ने बोर्ड के असेसमेंट क्राइटेरिया को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसमें तुरंत सुधार करने और उनके शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने की गुहार लगाई है।
विदेशी विश्वविद्यालयों में एडमिशन पर मंडराया संकट
याचिकाकर्ता छात्रों का तर्क है कि सीबीएसई के इस असेसमेंट फॉर्मूले के कारण उन्हें उम्मीद से बेहद कम अंक मिले हैं। चूंकि वे विदेशी विश्वविद्यालयों और वैश्विक शिक्षण संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया में शामिल हैं, इसलिए इन कम अंकों की वजह से उनके प्रोविजनल एडमिशन (Provisional Admission) रद्द होने की कनौबत आ गई है। छात्रों का कहना है कि विदेशी यूनिवर्सिटीज के सख्त मेरिट कट-ऑफ और एडमिशन मानदंडों के सामने सीबीएसई का यह आंतरिक मूल्यांकन उनके पिछले वर्षों के वास्तविक प्रदर्शन के साथ न्याय नहीं करता है।
सुप्रीम कोर्ट से निष्पक्ष मूल्यांकन और हस्तक्षेप की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में मांग की गई है कि अदालत सीबीएसई को विदेशी शिक्षण संस्थानों में नामांकित या आवेदन कर चुके छात्रों के लिए एक विशेष और निष्पक्ष मूल्यांकन पद्धति तैयार करने का निर्देश दे। छात्रों के वकीलों का कहना है कि यदि शीर्ष अदालत ने इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो सैकड़ों मेधावी छात्रों का पूरा एक साल बर्बाद हो जाएगा और वैश्विक स्तर पर उनका करियर प्रभावित होगा। अदालत इस मामले पर आने वाले दिनों में सुनवाई कर सकती है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।