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Kanji Benefits in Hindi: कांजी पीने के जबर्दस्त फायदे

कांजी वैसे तो ठंडी का एक पेय पदार्थ है लेकिन इसका आप किसी भी मौसम में सेवन कर सकते हैं। कांजी भारत के प्राचीन काल के गांवों का एक प्रसिद्ध पेय पदार्थ है, जिसका प्रयोग अब भी होता है लेकिन पहले की तरह नहीं।कांजी हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है और इसको बनाना आसान भी है। कांजी

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चूंकि कांची भारत में 80 के दशक में ज्यादा प्रचलित थी, इसलिए इसको बनाने में बिलकुल भी खर्च नहीं आता। आपको बस कुछ पुराने जमाने के अनाज और इसको बनाने की विधि पता होनी चाहिए।इस आर्टिकल में हम कांजी क्या है (What is Kanji in hindi), कांजी पीने के फायदे (Benefits of Kanji in hindi), कांजी कैसे बनाते हैं (How to cook Kanji in hindi) के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

कांजी क्या है

कांजी एक प्रोबायोटिक पेय पदार्थ है जो उत्तर भारतीय राज्यों में बनाया जाता है।आप इसकी तुलना कोम्बुचा से कर सकते हैं, लेकिन कांजी बनाने की प्रक्रिया कोम्बुचा से बिल्कुल अलग है।प्रोबायोटिक पेय होने के कारण यह आंत के लिए बहुत अच्छा है और पाचन में सुधार करता है।परंपरागत रूप से कांजी रेसिपी काली गाजर से बनाई जाती है और इस पेय पदार्थ का रंग गहरा बैंगनी होता है। लेकिन अगर काली गाजर नहीं मिले तो यह हेल्दी ड्रिंक लाल गाजर से बनायी जा सकती है।

कांजी में पिसी हुई सरसों, लाल मिर्च पाउडर और काला नमक या नमक के साथ बनाया जाता है।गाजर, मसाले, और कुछ उबले हुए ठंडे पानी में मिलाकर कुछ दिनों के लिए किण्वन के लिए रख दिया जाता है।फिर इसके बाद पूरा पेय एक गिलास या सिरेमिक जार में भरा जाता है।  इन जार को धूप में रखा जाता है और पेय को 2 से 3 से 4 दिनों तक किण्वन के लिए छोड़ दिया जाता है।

धूप में रखने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य की रोशनी कितनी तेज है।  इसलिए यदि धूप पर्याप्त न हो तो पेय को 4 से 5 दिनों तक रखा जा सकता है।  यदि मौसम गर्म या बहुत गर्म है, तो पेय को प्राकृतिक रूप से किण्वित करने के लिए 1 से 2 से 3 दिन पर्याप्त हैं।कांजी ड्रिंक में मौजूद सरसों उत्तर भारत की सर्दियों में शरीर को गर्म रखती है।किण्वन प्रक्रिया पेय के स्वाद को बदल देती है और इसे प्रोबायोटिक बनाती है। इसकी सुगंध बहुत मनभावक होती है इस मनभावन सुगंध के साथ इसका स्वाद हल्का मीठा और खट्टा होता है।कांजी को भूख बढ़ाने वाले आहार पेय के रूप में उपयोग जाता है। इसका स्वाद खट्टा, तीखा और तीखा होता है।

कांजी पीने के क्या फायदे हैं

कांजी स्वादिष्ट होने के साथ साथ बहुत स्वास्थवर्धक भी है।विशेषकर ठंडियों में अगर आप कांजी का सेवन करते हैं तो निम्न प्रकार के स्वास्थ लाभ हो सकते हैं।

एनर्जी के स्तर को बढ़ा देता है

अगर आपको मॉर्निंग सिकनेस (Morning sickness treatment in hindi) है तो आप सुबह सुबह कांजी का सेवन कर सकते हैं।कांजी एक एनर्जी ड्रिंक के रूप में भी प्रयोग की जाती है क्योंकि इसमें कुछ ऐसे कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं जो एनर्जी को बहुत ज्यादा बढ़ा देते हैं।

कब्ज में लाभदायक (Kanji for constipation in hindi)

अगर आप भी हमेशा कब्ज से परेशान रहते हैं और किसी प्राकृतिक और स्वादिष्ट उपचार का प्रयोग करना चाहते हैं तो आपको एक बार कांजी का सेवन जरूर करना चाहिए।कांजी को बनाने में अनाजों का प्रयोग होता है और अनाज में प्राकृतिक फाइबर उपस्थित होता है। आप सभी जानते हैं कि फाइबर कब्ज या पेट की अन्य सभी समस्याओं के लिए कितना अच्छा है।

अगर आपको सुबह सुबह आधे घंटे तक टॉयलेट में बैठे रहना पड़ता है और पेट पूरी तरह साफ नही होता तो काजी इसके लिए भी फायदेमंद है।कांजी में अनाजो का स्टार्च मिला रहता है जो पेट में उपस्थित अच्छे और लाभदायक बैक्टीरिया की संख्या को बढ़ाते हैं जिससे पेट अच्छी तरह साफ हो जाता है और गैस (Acidity) या अपच (Indigestion) की दिक्कत नही होती।

शरीर के पानी के स्तर को बनाए रखता है

कांजी गर्मियों के लिए भी बहुत जरूरी पेय पदार्थ है।कांजी में अनाज व विभिन्न प्रकार के स्वास्थवर्धक सामाग्री उपस्थित रहती है जिसके कारण यह शरीर से पानी की कमी नही होने देता।

कांजी घर में कैसे बनाएं

घर में कांजी बनाने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया को अपनाए।

  • गाजर को धोकर छील लें और5 से 2 इंच लंबाई के डंडों या डंडों में काट लें।
  • चुकंदर को छीलकर5 से 2 इंच के वेजेज या स्टिक्स में काट लें।
  • एक सूखे ग्राइंडर में, 2 बड़े चम्मच पीली सरसों को बारीक पीस लें। यदि काली या भूरी सरसों है, तो 1 बड़े चम्मच का उपयोग करें।
  • पहले पानी उबाल लें। फिर इसे कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें।
  • फिर चौड़े मुंह वाले साफ और सूखे सिरेमिक या कांच के जार में, गाजर, चुकंदर, पिसी हुई पीली सरसों का पाउडर, काला नमक या नियमित नमक और लाल मिर्च पाउडर डालें।
  • इस उबले हुए ठंडे पानी को जार में डालें। आप चाहें तो पानी को जार में डालते समय एक महीन जाली वाली छलनी से छान सकते हैं।
  • इस मिश्रण को साफ सूखे चम्मच से अच्छी तरह चला लें।
  • ढक्कन से ढीला ढकें या कीट पतंगों और धूल से सुरक्षा हेतु जार या बोतलों के मुंह पर मलमल/पनीर का कपड़ा बांधें।
  • फिर जार या बोतलों को धूप में रखें।
  • 2 से 3 दिनों के लिए किण्वन होने दें जब तक कि पेय खट्टा न हो जाए। ध्यान रखें कि पेय को अधिक किण्वित न करें।
  • मिश्रण को हर अगले दिन धूप में रखने से पहले एक साफ लकड़ी के चम्मच से हिलाएं।  वैकल्पिक रूप से जार को चम्मच से मिलाने के बजाय हिलाएं।

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