Kanya Sankranti : जानें – कब है सूर्य की संक्रांति? महापुण्य काल, प्रभाव और उपाय

सूर्य का एक राशि से दूसरे राशि में गोचर को संक्रांति कहा जाता है। पूरे एक वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं। सूर्य बारी-बारी से 12 राशियों में गोचर करता है।

सूर्य का एक राशि से दूसरे राशि में गोचर को संक्रांति कहा जाता है। पूरे एक वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं। सूर्य बारी-बारी से 12 राशियों में गोचर करता है। इस बार सूर्य कन्या राशि में गोचर करने वाला है। सूर्य की संक्रांति का सभी राशियों पर अच्छा और बुरा प्रभाव पड़ता है। तो आइए जानते हैं कि सूर्य की कन्या संक्रांति का समय क्या है? कन्या संक्रांति किन राशि वालों के लिए लाभदायक होगी?

solar solstice

सूर्य की कन्या संक्रांति –

सूर्य का कन्या राशि में गोचर का समय आज रात 12 बजे के बाद 17 सितंबर को 01 बजकर 29 पर होगा।

कन्या संक्रांति का पुण्य काल

कन्या संक्रांति का पुण्य काल 06 घंटे 08 मिनट का है। यह 17 सितंबर को प्रात: 06 बजकर 07 मिनट से प्रारंभ होकर दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक है।

कन्या संक्रांति महापुण्य काल-

सूर्य की कन्या संक्रांति का महापुण्य काल 17 सिंतबर को प्रात: 06 बजकर 07 मिनट से सुबह 08 बजकर 10 मिनट तक है। महापुण्य काल की अवधि 02 घंटा 03 मिनट है।

कन्या संक्रांति  उपाय-

आप जानते हैं​ कि मकर संक्रांति के समय सुबह स्नान और दान का विधान है। ऐसे ही कन्या संक्रांति पर भी आपको सुबह स्नान करने के बाद ब्राह्मणों को दान देना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को लाल पुष्प, अक्षत् और लाल चंदन मिश्रित जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से सूर्य देव की आप पर कृपा होगी और आपका कर्म क्षेत्र प्रभावशाली होगा।

कन्या संक्रांति का प्रभाव-

सूर्य का गोचर कन्या राशि में हो रहा है, ऐसे में कन्या राशि वालों को तरक्की का योग है। नई नौकरी पाने का प्रयास सफल हो सकता है। समाज में आपकी पद और प्रतिष्ठा दोनों ही बढ़ने के संकेत हैं। आपको जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। हालांकि आपको अपने गुस्से और जुबान पर नियंत्रण रखना होगा। दांपत्य जीवन को प्रभावित होने से बचाएं।

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